📷 चित्र स्रोत: TOI City (via NewsData)
देश
लखनऊ की 100 साल पुरानी मजलिस-ए-शाम-ए-गरीबां परंपरा का उत्सव
✍️ TOI City
🗓 19 जून 2026, 06:31 AM
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लखनऊ से उत्पन्न एक महत्वपूर्ण परंपरा, मजलिस-ए-शाम-ए-गरीबां, के आयोजन के 100 वर्ष पूरे हो गए हैं। यह घटना इस अनूठी सांस्कृतिक प्रथा के विश्व के साथ साझा किए जाने की एक सदी को चिह्नित करती है।
लखनऊ शहर ने मजलिस-ए-शाम-ए-गरीबां के नाम से जानी जाने वाली एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा के सौ साल पूरे होने का जश्न मनाया है। यह परंपरा, जिसकी शुरुआत लखनऊ में हुई थी, अब 100 वर्षों से मनाई जा रही है।
मजलिस-ए-शाम-ए-गरीबां एक अनूठी प्रथा है जिसे पीढ़ियों से संवारा और आगे बढ़ाया गया है। इसकी शताब्दी समारोह इसकी स्थायी विरासत और लखनऊ की सांस्कृतिक धरोहर में इसके योगदान को रेखांकित करता है।
इस परंपरा को न केवल शहर के भीतर बनाए रखा गया है, बल्कि इसे साझा भी किया गया है, जिससे यह अपनी उत्पत्ति के स्थान से परे पहचानी जाने वाली प्रथा के रूप में स्थापित हुई है।
मजलिस-ए-शाम-ए-गरीबां एक अनूठी प्रथा है जिसे पीढ़ियों से संवारा और आगे बढ़ाया गया है। इसकी शताब्दी समारोह इसकी स्थायी विरासत और लखनऊ की सांस्कृतिक धरोहर में इसके योगदान को रेखांकित करता है।
इस परंपरा को न केवल शहर के भीतर बनाए रखा गया है, बल्कि इसे साझा भी किया गया है, जिससे यह अपनी उत्पत्ति के स्थान से परे पहचानी जाने वाली प्रथा के रूप में स्थापित हुई है।