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लखनऊ में पंचायत सहायकों का प्रदर्शन: 6 हजार रुपये मानदेय पर उठी मांगें
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लखनऊ में पंचायत सहायकों ने 6 हजार रुपये मानदेय पर प्रदर्शन किया, मांग है मानदेय बढ़ाने की।
लखनऊ में पंचायत सहायकों ने 6 हजार रुपये मानदेय पर प्रदर्शन किया, मांग है मानदेय बढ़ाने की।
गांव के युवाओं से पंचायत स्तर पर काम की जिम्मेदारी संभालने की उम्मीद थी, पर 6 हजार रुपये में उन्हें एक दर्जन से अधिक कार्य सौंपे गए हैं।
कागज में कहा गया है कि पंचायत सहायकों पर कोई परीक्षा या स्थायी नौकरी का बंधन नहीं है, पर वास्तविकता में काम का दबाव उन्हें दूसरा रास्ता तलाशने का समय ही नहीं देता।
कई युवा दिनभर कागज‑पत्र लेकर ब्लॉक और पंचायत कार्यालयों के चक्कर लगाते हैं, जिससे उनकी आय और भविष्य पर असर पड़ता है।
सरकार को मानदेय बढ़ाने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, क्योंकि ये युवा सिर्फ कर्मचारी नहीं, बल्कि गांव की सरकारी व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं।
गांव के युवाओं से पंचायत स्तर पर काम की जिम्मेदारी संभालने की उम्मीद थी, पर 6 हजार रुपये में उन्हें एक दर्जन से अधिक कार्य सौंपे गए हैं।
कागज में कहा गया है कि पंचायत सहायकों पर कोई परीक्षा या स्थायी नौकरी का बंधन नहीं है, पर वास्तविकता में काम का दबाव उन्हें दूसरा रास्ता तलाशने का समय ही नहीं देता।
कई युवा दिनभर कागज‑पत्र लेकर ब्लॉक और पंचायत कार्यालयों के चक्कर लगाते हैं, जिससे उनकी आय और भविष्य पर असर पड़ता है।
सरकार को मानदेय बढ़ाने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, क्योंकि ये युवा सिर्फ कर्मचारी नहीं, बल्कि गांव की सरकारी व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं।