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30 सित. 2026•
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लखीमपुर खीरी: पैतृक जमीन विवाद में परिवार रजिस्टर में हेरफेर का आरोप, सीडीओ से जांच की मांग

✍️ रिपोर्टर: Vikas Shukla 🗓 30 सित. 2026, 02:39 PM 👁 21
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लखीमपुर खीरी के धौरहरा ब्लॉक में पैतृक जमीन को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है। ग्राम निवासी आनंद कुमार ने मुख्य विकास अधिकारी से परिवार रजिस्टर में कथित तौर पर नाम हटाए जाने और जमीन अपने नाम कराने के प्रयासों की जांच की मांग की है।

लखीमपुर खीरी जिले के धौरहरा ब्लॉक के रामनगर बगहा गांव में पैतृक जमीन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम निवासी आनंद कुमार पुत्र रमेश कुमार ने मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) खीरी को एक प्रार्थना पत्र सौंपकर परिवार रजिस्टर की नकल में कथित काट-छांट और अपनी दादी ज्ञानवती के नाम दर्ज निजी कृषि भूमि से उनका नाम हटाकर अपने नाम दर्ज कराने के प्रयासों की जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीन पर अधिकार जमाने के लिए परिवार रजिस्टर में बदलाव किया गया और धोखाधड़ी की गई।

शिकायत में भगवती प्रसाद, कमलेश कुमार, रामरानी समेत कुछ अन्य लोगों पर साजिश रचने और धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया है। आनंद कुमार के अनुसार, 29 मई 2026 को संबंधित कृषि भूमि को अपने नाम दर्ज कराने की कार्रवाई की जानी थी। इस मामले में पूर्व पंचायत सचिव नवीन राठौर के कार्यकाल से जुड़े परिवार रजिस्टर में कथित हस्तक्षेप का आरोप है, जबकि वर्तमान में पंचायत सचिव रामनिवास हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि परिवार रजिस्टर में वास्तव में कोई बदलाव हुआ या नहीं, और यदि हुआ तो किस प्रक्रिया के तहत।

विवाद को लेकर गांव में लगभग 50 ग्रामीणों की मौजूदगी में एक खुली बैठक भी हुई, जिसमें ग्रामीणों ने आनंद कुमार और ज्ञानवती के पारिवारिक संबंधों पर अपनी बात रखी। इसके बावजूद विवाद थमा नहीं है। शिकायतकर्ता ने जमीन और अभिलेखों से जुड़े विवाद के बीच धमकी दिए जाने का भी गंभीर आरोप लगाया है। इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

मामले में अगली तारीख 13 अक्टूबर तय होने की बात सामने आई है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं कि क्या परिवार रजिस्टर में वास्तव में कोई नाम हटाया गया, यदि बदलाव हुआ तो किस नियम और प्रक्रिया के तहत, जमीन के अभिलेखों में नाम दर्ज कराने की कार्रवाई किस आधार पर हुई और धमकी के आरोपों की वास्तविकता क्या है। इन सभी सवालों के जवाब जांच और मूल अभिलेखों की पड़ताल के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
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