स्वास्थ्य
लखीमपुर खीरी: आशा कार्यकर्ता पर लापरवाही और अवैध वसूली का गंभीर आरोप, नवजात शिशुओं की जान से खिलवाड़
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लखीमपुर खीरी जिले में एक आशा कार्यकर्ता पर नवजात शिशुओं की देखभाल में लापरवाही बरतने और टीकाकरण की जानकारी न देने का गंभीर आरोप लगा है। ग्रामीणों का दावा है कि पैसे के लालच में वह मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रही है और जन्म प्रमाण पत्र भी नहीं दे रही है।
लखीमपुर खीरी जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नकहा के अधीन ग्राम पंचायत चाऊपुर के गांव पंडरी में तैनात आशा कार्यकर्ता उर्मिला पाल पर नवजात शिशुओं की देखभाल न करने और टीकाकरण संबंधी जानकारी लाभार्थियों को न देने का गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि आशा कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारियों का सही ढंग से निर्वहन नहीं कर रही हैं, जिसका स्वास्थ्य सेवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
आरोप है कि आशा कार्यकर्ता उर्मिला देवी पैसे के लालच में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। कुछ मरीजों के बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र भी पैसे न मिलने के कारण नहीं दिए जा रहे हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पिछले कुछ साल में आशा कार्यकर्ता की कथित लापरवाही के चलते 12 सीज़र ऑपरेशन हुए हैं और दो महिलाओं की मृत्यु भी हो चुकी है। इन घटनाओं के कारण मरीज और उनके परिजन आशा कार्यकर्ता के साथ जाने से कतरा रहे हैं और अपनी मर्जी से स्वास्थ्य केंद्रों पर जा रहे हैं, जिससे व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
इस गंभीर मामले के संबंध में जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नकहा के अधीक्षक से संपर्क किया गया, तो उन्होंने इस पर कोई ध्यान न देने की बात कही। यह स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और लाभार्थियों के विश्वास पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
आरोप है कि आशा कार्यकर्ता उर्मिला देवी पैसे के लालच में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। कुछ मरीजों के बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र भी पैसे न मिलने के कारण नहीं दिए जा रहे हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पिछले कुछ साल में आशा कार्यकर्ता की कथित लापरवाही के चलते 12 सीज़र ऑपरेशन हुए हैं और दो महिलाओं की मृत्यु भी हो चुकी है। इन घटनाओं के कारण मरीज और उनके परिजन आशा कार्यकर्ता के साथ जाने से कतरा रहे हैं और अपनी मर्जी से स्वास्थ्य केंद्रों पर जा रहे हैं, जिससे व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
इस गंभीर मामले के संबंध में जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नकहा के अधीक्षक से संपर्क किया गया, तो उन्होंने इस पर कोई ध्यान न देने की बात कही। यह स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और लाभार्थियों के विश्वास पर गंभीर सवाल खड़े करती है।