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25 सित. 2026•
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सीमित यूपीआई लेनदेन मूल्य से मर्चेंट डिस्काउंट रेट पर खतरा
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Srinivasan V
बिज़नेस

सीमित यूपीआई लेनदेन मूल्य से मर्चेंट डिस्काउंट रेट पर खतरा

✍️ India Business Trade 🗓 25 सित. 2026, 04:34 AM 👁 10
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व्यवसायों ने चेतावनी दी है कि यूपीआई लेनदेन मूल्य पर वर्तमान सीमा मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) दायित्व को बढ़ा सकती है, जिससे नियामक समीक्षा की मांग हो रही है।

भारत के भुगतान तंत्र में एक नई चिंता उभरी है, जहाँ उद्योग के प्रतिनिधियों ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPI) लेनदेन के सीमित मूल्य सीमा को संभावित जोखिम के रूप में उजागर किया है। विश्लेषकों का कहना है कि जब लेनदेन की राशि पर सीमा लगाई जाती है, तो मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का बोझ अधिकतर व्यापारियों पर पड़ता है, जिससे उनकी लाभप्रदता प्रभावित हो सकती है।

वित्तीय संस्थानों और व्यापारी संघों ने इस मुद्दे को नियामकों के सामने रखा है, यह तर्क देते हुए कि मौजूदा ढांचा अनजाने में छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों पर लागत का भार डाल रहा है, जो दैनिक बिक्री के लिए UPI पर बहुत अधिक निर्भर हैं। वे सुझाव देते हैं कि MDR संरचना का पुनर्मूल्यांकन आवश्यक है ताकि यह सीमित लेनदेन मूल्यों के साथ संगत हो।

वर्तमान में यह विषय नीति निर्माताओं के बीच चर्चा का बिंदु है, जो उपभोक्ता सुविधा की रक्षा के साथ-साथ व्यापारियों को अनावश्यक वित्तीय दबाव से बचाने के संतुलन को खोज रहे हैं। हितधारकों को आगे की दिशा‑निर्देशों की प्रतीक्षा है, जो कम‑मूल्य UPI भुगतान के लिए MDR गणना पद्धति को पुनः आकार दे सकते हैं।

यदि इस असंतुलन को नहीं सुधारा गया, तो यह UPI अपनाने की दर को प्रभावित कर सकता है और नकद‑रहित अर्थव्यवस्था के व्यापक लक्ष्य को बाधित कर सकता है। उद्योग विशेषज्ञ इस बात पर ज़ोर देते हैं कि डिजिटल भुगतान के विकास को स्थायी बनाने के लिए संतुलित उपाय आवश्यक हैं।
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