Agriculture
लगभग 11.23 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान मिलने पर किसानों ने जताया प्रशासन का आभार, लेकिन 150 करोड़ से अधिक बकाया भुगतान को लेकर नाराजगी बरकरार
बहेड़ी के केसर शुगर मिल से 11.23 करोड़ रुपये का भुगतान मिलने से किसानों ने प्रशासन की सराहना की, पर 150 करोड़ रुपये से अधिक बकाया अभी भी बरकरार है।
बहेड़ी में स्थित केसर शुगर मिल के बकाया गन्ना भुगतान को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे किसानों को लगभग 11.23 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई है। इस राशि के मिलने पर उन्होंने जिला प्रशासन, जिलाधिकारी बरेली और एसडीएम बहेड़ी सहित संबंधित अधिकारियों का आभार व्यक्त किया, पर शेष 150 करोड़ रुपये से अधिक के बकाया भुगतान को लेकर असंतोष बना हुआ है।
नीड 24 न्यूज ने किसानों से की बात
किसानों का कहना है कि प्रशासनिक सख्ती, निरंतर प्रयास और किसानों की एकजुट आवाज के कारण ही यह राशि उपलब्ध हो सकी। उन्होंने प्रशासन को बधाई दी और आशा जताई कि अब तक दिखाए गए गंभीरता के साथ आगे भी पूरी कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि उनका पूरा हक मिल सके।
फिर भी किसानों का मुख्य सवाल यह है कि कुल बकाया में से शेष 150 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि कब तक उनके खातों में पहुँचेगी। वे मिल प्रबंधन से स्पष्ट समय‑सीमा और भुगतान प्रक्रिया के बारे में ठोस जवाब की मांग कर रहे हैं।
गन्ने का भुगतान केवल आर्थिक लेन‑देन नहीं, बल्कि किसानों के परिवारों की रोज़मर्रा की जरूरतें, बच्चों की पढ़ाई, बेटियों की शादी और अगली फसल की तैयारी से जुड़ा है। लंबे समय तक भुगतान अटका रहने से कई किसान आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे थे।
किसान प्रशासन के प्रयासों की सराहना करते हुए अब वे मिल प्रबंधन से केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट उत्तर और समयबद्ध कार्यवाही चाहते हैं। उनका मानना है कि पूरी बकाया राशि का निपटारा तब तक नहीं माना जा सकता जब तक अंतिम भुगतान नहीं हो जाता।
नीड 24 न्यूज ने किसानों से की बात
किसानों का कहना है कि प्रशासनिक सख्ती, निरंतर प्रयास और किसानों की एकजुट आवाज के कारण ही यह राशि उपलब्ध हो सकी। उन्होंने प्रशासन को बधाई दी और आशा जताई कि अब तक दिखाए गए गंभीरता के साथ आगे भी पूरी कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि उनका पूरा हक मिल सके।
फिर भी किसानों का मुख्य सवाल यह है कि कुल बकाया में से शेष 150 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि कब तक उनके खातों में पहुँचेगी। वे मिल प्रबंधन से स्पष्ट समय‑सीमा और भुगतान प्रक्रिया के बारे में ठोस जवाब की मांग कर रहे हैं।
गन्ने का भुगतान केवल आर्थिक लेन‑देन नहीं, बल्कि किसानों के परिवारों की रोज़मर्रा की जरूरतें, बच्चों की पढ़ाई, बेटियों की शादी और अगली फसल की तैयारी से जुड़ा है। लंबे समय तक भुगतान अटका रहने से कई किसान आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे थे।
किसान प्रशासन के प्रयासों की सराहना करते हुए अब वे मिल प्रबंधन से केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट उत्तर और समयबद्ध कार्यवाही चाहते हैं। उनका मानना है कि पूरी बकाया राशि का निपटारा तब तक नहीं माना जा सकता जब तक अंतिम भुगतान नहीं हो जाता।