📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bernard Gagnon
स्थानीय
गुजरात के उरपकोट किले में बाघ का शिकार: 4 दिन, ड्रोन और ट्रैकर टीमों की मदद
✍️ News18
🗓 04 सित. 2026, 08:33 PM
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उरपकोट किले में घुसे बाघ को वन अधिकारियों ने चार दिन तक ड्रोन, ट्रैकर टीमों और अस्थायी पिंजरे से पकड़ने की कोशिश की।
जुन्नागढ़ के उरपकोट किले में बाघ दिखे जाने के बाद गुजरात के वन अधिकारियों ने एक संगठित कार्रवाई शुरू की। यह शिकार चार दिन तक चला, जिसमें बाघ को किले के आँगन और दीवारों के आसपास घूमते देखा गया।
राज्य वन विभाग ने दो ट्रैकर टीमों को जीपीएस कॉलर और नाइट‑विजन उपकरणों से सुसज्जित किया, जबकि ड्रोन का उपयोग बाघ की हरकतों को ऊपर से निगरानी करने के लिये किया गया। पाँच मजबूत पिंजरे किले के रणनीतिक स्थानों पर रखे गए ताकि बाघ को बिना चोट पहुँचाए फँसाया जा सके।
चार दिनों की सतर्कता और कई प्रयासों के बाद बाघ को अंततः एक पिंजरे में सुरक्षित किया गया और वन अधिकारियों को सौंप दिया गया, जहाँ उसे सुरक्षित वन क्षेत्र में पुनर्वास के लिये ले जाया जाएगा।
यह अभियान यह दर्शाता है कि ऐतिहासिक स्थलों में पारंपरिक पकड़ने की विधियों की सीमाओं को देखते हुए वन प्रबंधन में ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ रहा है।
राज्य वन विभाग ने दो ट्रैकर टीमों को जीपीएस कॉलर और नाइट‑विजन उपकरणों से सुसज्जित किया, जबकि ड्रोन का उपयोग बाघ की हरकतों को ऊपर से निगरानी करने के लिये किया गया। पाँच मजबूत पिंजरे किले के रणनीतिक स्थानों पर रखे गए ताकि बाघ को बिना चोट पहुँचाए फँसाया जा सके।
चार दिनों की सतर्कता और कई प्रयासों के बाद बाघ को अंततः एक पिंजरे में सुरक्षित किया गया और वन अधिकारियों को सौंप दिया गया, जहाँ उसे सुरक्षित वन क्षेत्र में पुनर्वास के लिये ले जाया जाएगा।
यह अभियान यह दर्शाता है कि ऐतिहासिक स्थलों में पारंपरिक पकड़ने की विधियों की सीमाओं को देखते हुए वन प्रबंधन में ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ रहा है।