📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Phyna Lobo
कृषि
श्रम की कमी से गोवा के कटबोना जेटी पर लगभग 25% ट्रॉलर बेकार
✍️ The Times of India
🗓 22 सित. 2026, 06:15 AM
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श्रमिकों की कमी के कारण गोवा के कटबोना जेटी पर लंगर डाले लगभग 25% ट्रॉलर बेकार रह गए हैं, जिससे मछुआरों की आय पर असर पड़ा है।
गोवा के कटबोना जेटी, जो राज्य के मत्स्य बेड़े का प्रमुख केंद्र है, यहाँ लगभग हर चौथे ट्रॉलर के बेकार रहने से संचालन में गंभीर गिरावट आई है। मछुआरों और जहाज़ मालिकों ने इस ठहराव का कारण कुशल श्रमिकों की लगातार कमी बताया है, जिससे बड़ी संख्या में नावों को चालक दल नहीं मिल पा रहा है।
उद्योग के सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में श्रम की कमी बढ़ती गई है, जिससे मालिकों को अपनी नौकाओं के लिए आवश्यक कर्मियों को जुटाना मुश्किल हो रहा है। परिणामस्वरूप, बेकार ट्रॉलर जेटी पर खड़े हैं, जबकि कई मछुआरों की आय घट गई है और आगामी मत्स्य सत्र को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
स्थानीय अधिकारियों से मदद की मांग की गई है, पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यह स्थिति भारत के तटीय मत्स्य क्षेत्र के व्यापक चुनौतियों को उजागर करती है, जहाँ श्रम उपलब्धता सीधे उत्पादन और तटीय समुदायों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती है।
हितधारियों की आशा है कि भर्ती अभियानों या नीति समर्थन के माध्यम से शीघ्र समाधान निकाला जाएगा, जिससे बेकार नावें फिर से समुद्र में उतरें और प्रभावित मछुआरों की आय सामान्य हो सके।
उद्योग के सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में श्रम की कमी बढ़ती गई है, जिससे मालिकों को अपनी नौकाओं के लिए आवश्यक कर्मियों को जुटाना मुश्किल हो रहा है। परिणामस्वरूप, बेकार ट्रॉलर जेटी पर खड़े हैं, जबकि कई मछुआरों की आय घट गई है और आगामी मत्स्य सत्र को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
स्थानीय अधिकारियों से मदद की मांग की गई है, पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यह स्थिति भारत के तटीय मत्स्य क्षेत्र के व्यापक चुनौतियों को उजागर करती है, जहाँ श्रम उपलब्धता सीधे उत्पादन और तटीय समुदायों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती है।
हितधारियों की आशा है कि भर्ती अभियानों या नीति समर्थन के माध्यम से शीघ्र समाधान निकाला जाएगा, जिससे बेकार नावें फिर से समुद्र में उतरें और प्रभावित मछुआरों की आय सामान्य हो सके।