📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ypy31
राजनीति
मणिपुर में कुकि समूहों ने एनआरसी को अस्वीकार, जनगणना से पहले की मांग
✍️ Deccan Herald
🗓 23 अग. 2026, 08:47 PM
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मणिपुर के कुकि संगठनों ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को अस्वीकार किया, क्योंकि जनगणना से पहले इसका कोई वैध आधार नहीं है।
मणिपुर के कुकि समुदाय के समूहों ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को अस्वीकार कर दिया है और कहा है कि अगली जनगणना के बाद तक इसका कोई वैध कानूनी आधार नहीं है। वे मानते हैं कि जनगणना, जो इस वर्ष के अंत में होने वाली है, जनसंख्या का सटीक आँकड़ा प्रदान करेगी और तभी नागरिकता की पुष्टि की जानी चाहिए।
कुकि समूहों के प्रतिनिधियों ने कहा कि जनगणना के बिना एनआरसी चलाने से कई वैध निवासियों को गलती से बाहर किया जा सकता है, विशेषकर सीमा के निकट स्थित संवेदनशील जिलों में। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से जनगणना को प्राथमिकता देने और सभी जातीय समुदायों से परामर्श करने का आग्रह किया।
यह विरोध मणिपुर में जातीय पहचान और भूमि अधिकारों के संवेदनशील मुद्दों को और जटिल बनाता है। जबकि केंद्र सरकार ने नई एनआरसी के लिए कोई निश्चित समय‑सारणी नहीं दी है, कुकि समूहों की यह स्थिति अधिक समावेशी और डेटा‑आधारित प्रक्रिया की मांग को उजागर करती है।
वर्तमान में गृह मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है और यह मुद्दा राज्य प्रशासन तथा समुदाय के नेताओं के बीच आगामी बैठकों में चर्चा का विषय बन सकता है।
कुकि समूहों के प्रतिनिधियों ने कहा कि जनगणना के बिना एनआरसी चलाने से कई वैध निवासियों को गलती से बाहर किया जा सकता है, विशेषकर सीमा के निकट स्थित संवेदनशील जिलों में। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से जनगणना को प्राथमिकता देने और सभी जातीय समुदायों से परामर्श करने का आग्रह किया।
यह विरोध मणिपुर में जातीय पहचान और भूमि अधिकारों के संवेदनशील मुद्दों को और जटिल बनाता है। जबकि केंद्र सरकार ने नई एनआरसी के लिए कोई निश्चित समय‑सारणी नहीं दी है, कुकि समूहों की यह स्थिति अधिक समावेशी और डेटा‑आधारित प्रक्रिया की मांग को उजागर करती है।
वर्तमान में गृह मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है और यह मुद्दा राज्य प्रशासन तथा समुदाय के नेताओं के बीच आगामी बैठकों में चर्चा का विषय बन सकता है।