📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Unknown Kangra muralists (and at-least one artist
धर्म
उज्जैन के नारायण धाम में कृष्ण‑सुदामा की 5,000 साल पुरानी मित्रता का अनुष्ठान
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 04 सित. 2026, 01:47 PM
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उज्जैन के महिदपुर तहसील के नारायणा गांव स्थित नारायणा धाम में भक्त भगवान कृष्ण को उनके मित्र सुदामा के साथ पूजते हैं, जो 5,000 साल पुरानी मित्रता का प्रतीक है।
उज्जैन जिले के महिदपुर तहसील में स्थित नारायणा गांव के नारायणा धाम को भगवान कृष्ण और उनके मित्र सुदामा की प्राचीन मित्रता से जोड़ा गया प्रमुख तीर्थस्थल माना जाता है। यहाँ पर राधा‑रुक्मिणी के बजाय कृष्ण के साथ सुदामा की पूजा की जाती है, जो जन्माष्टमी के दौरान दुर्लभ रूप से देखा जाता है।
भक्तों का समूह यहाँ आकर अर्चना, आरती और दोनों देवताओं को अर्पण करता है, जिससे सुदामा की विनम्रता और कृष्ण की दया का संदेश प्रसारित होता है। स्थानीय पुजारी विशेष अनुष्ठान करते हैं, जिसमें सुदामा को समान दर्जा दिया जाता है, जिससे सामाजिक वर्गभेद के पार मित्रता की महत्ता उजागर होती है।
पौराणिक ग्रंथों में इस मित्रता को 5,000 साल पुराना बताया गया है, जो इसकी पौराणिकता को दर्शाता है। हर वर्ष जन्माष्टमी के अवसर पर धाम पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है, जो मित्रता, समृद्धि और आध्यात्मिक समानता की कामना लेकर आते हैं।
धाम के प्रबंधकों ने बताया कि हाल के वर्षों में यहाँ आने वाले यात्रियों की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है, क्योंकि लोग कृष्ण कथा के कम ज्ञात पहलुओं में रुचि ले रहे हैं। इस स्थल के भीतर एक प्राचीन बरगद का वृक्ष स्थित है, जिसे स्थानीय लोग सुदामा‑कृष्ण की शाश्वत मित्रता का साक्षी मानते हैं।
भले ही संरचना में साधारणता बनी रहे, नारायणा धाम की सांस्कृतिक महत्ता बढ़ती जा रही है, जिससे यह मित्रता के प्रतीक के रूप में एक अनूठा केंद्र बन गया है।
भक्तों का समूह यहाँ आकर अर्चना, आरती और दोनों देवताओं को अर्पण करता है, जिससे सुदामा की विनम्रता और कृष्ण की दया का संदेश प्रसारित होता है। स्थानीय पुजारी विशेष अनुष्ठान करते हैं, जिसमें सुदामा को समान दर्जा दिया जाता है, जिससे सामाजिक वर्गभेद के पार मित्रता की महत्ता उजागर होती है।
पौराणिक ग्रंथों में इस मित्रता को 5,000 साल पुराना बताया गया है, जो इसकी पौराणिकता को दर्शाता है। हर वर्ष जन्माष्टमी के अवसर पर धाम पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है, जो मित्रता, समृद्धि और आध्यात्मिक समानता की कामना लेकर आते हैं।
धाम के प्रबंधकों ने बताया कि हाल के वर्षों में यहाँ आने वाले यात्रियों की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है, क्योंकि लोग कृष्ण कथा के कम ज्ञात पहलुओं में रुचि ले रहे हैं। इस स्थल के भीतर एक प्राचीन बरगद का वृक्ष स्थित है, जिसे स्थानीय लोग सुदामा‑कृष्ण की शाश्वत मित्रता का साक्षी मानते हैं।
भले ही संरचना में साधारणता बनी रहे, नारायणा धाम की सांस्कृतिक महत्ता बढ़ती जा रही है, जिससे यह मित्रता के प्रतीक के रूप में एक अनूठा केंद्र बन गया है।