📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Itzashwini
मौसम
नेपाल की भारी बारिश से कोसी नदी का जलप्रवाह तेज, भीमनगर बराज से 2.88 लाख क्यूसेक पानी निकला
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 26 सित. 2026, 09:36 AM
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नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश से कोसी नदी का प्रवाह भीमनगर बराज पर 2.88 लाख क्यूसेक तक बढ़ गया, 3.30 लाख तक पहुंचने की संभावना है।
नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्रों में तेज़ बारिश के कारण कोसी नदी का जलप्रवाह तेज़ी से बढ़ रहा है। शुक्रवार रात को भीमनगर बराज से 2.88 लाख क्यूसेक (क्यूबिक फीट प्रति सेकंड) पानी निकलने की सूचना मिली, जबकि बराह क्षेत्र में 2.48 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया।
हाइड्रोलॉजिस्ट का कहना है कि यदि बारिश जारी रही तो जलप्रवाह 3.30 लाख क्यूसेक तक पहुंच सकता है, जिससे बिहार के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। इस जोखिम को कम करने के लिए बराज के 38 फाटक खुले जा चुके हैं।
राज्य आपदा प्रबंधन एजेंसी ने सतर्कता स्तर बढ़ा दिया है, नदी के स्तर को रीयल‑टाइम में मॉनिटर किया जा रहा है और संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निकासी योजना तैयार की जा रही है। बाढ़ के जोखिम वाले गांवों को सतर्क रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
अब तक बराज में कोई बड़ी दरार या संरचनात्मक क्षति की रिपोर्ट नहीं आई है, पर अधिकारियों ने कहा है कि स्थिति अभी भी बदल सकती है और अगले 48 घंटों में मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगी।
कोसी, जिसे अक्सर "बिहार की पीड़ा" कहा जाता है, का इतिहास अचानक बाढ़ से भरा रहा है, और वर्तमान जलप्रवाह भारत‑नेपाल के बीच जल प्रबंधन के महत्व को फिर से उजागर करता है।
हाइड्रोलॉजिस्ट का कहना है कि यदि बारिश जारी रही तो जलप्रवाह 3.30 लाख क्यूसेक तक पहुंच सकता है, जिससे बिहार के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। इस जोखिम को कम करने के लिए बराज के 38 फाटक खुले जा चुके हैं।
राज्य आपदा प्रबंधन एजेंसी ने सतर्कता स्तर बढ़ा दिया है, नदी के स्तर को रीयल‑टाइम में मॉनिटर किया जा रहा है और संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निकासी योजना तैयार की जा रही है। बाढ़ के जोखिम वाले गांवों को सतर्क रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
अब तक बराज में कोई बड़ी दरार या संरचनात्मक क्षति की रिपोर्ट नहीं आई है, पर अधिकारियों ने कहा है कि स्थिति अभी भी बदल सकती है और अगले 48 घंटों में मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगी।
कोसी, जिसे अक्सर "बिहार की पीड़ा" कहा जाता है, का इतिहास अचानक बाढ़ से भरा रहा है, और वर्तमान जलप्रवाह भारत‑नेपाल के बीच जल प्रबंधन के महत्व को फिर से उजागर करता है।