📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Vijayanrajapuram
बिज़नेस
केरल के ₹5,900 करोड़ KIIFB प्रोजेक्ट्स में ULCCS की देरी, ऋण चिंता बढ़ी
✍️ The Week
🗓 31 अक्टू. 2026, 03:02 PM
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केरल के KIIFB के तहत ULCCS को दिए गए ₹5,900 करोड़ के आधे प्रोजेक्ट्स अभी भी अधूरे हैं, जिससे राज्य के बढ़ते ऋण को लेकर चिंता बढ़ी है।
केरल इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (KIIFB) ने राज्य के परिवहन, आवास और शहरी विकास को तेज करने के लिये लगभग ₹5,900 करोड़ के प्रोजेक्ट्स मंजूर किए हैं। इनमें से लगभग आधे प्रोजेक्ट्स यूनाइटेड लॉजिस्टिक्स एंड कंस्ट्रक्शन कंपनी (ULCCS) को सौंपे गए, जिससे यह निजी भागीदार प्रमुख बन गया।
निगरानी रिपोर्टों के अनुसार ULCCS को दिए गए आधे कार्य अभी भी अधूरे हैं, कई साइटों पर निर्माण रुक गया है और समय‑सीमा में देरी दर्ज की गई है। कारणों में फंडिंग में कमी, खरीद प्रक्रिया में अड़चन और ज़मीनी अधिग्रहण की कठिनाइयाँ शामिल हैं।
राज्य के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अधूरे प्रोजेक्ट्स के कारण केरल की वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा, जबकि राज्य पहले से ही बढ़ते ऋण बोझ से जूझ रहा है। इस देरी से वह राजस्व भी प्रभावित हो सकता है, जो KIIFB के उधार लागत को संतुलित करने की उम्मीद थी।
सरकार वर्तमान में अनुबंध शर्तों की पुनः समीक्षा कर रही है और ठहराव को दूर करने के लिये अतिरिक्त वित्तीय विकल्पों की तलाश कर रही है, साथ ही ULCCS को संशोधित समय‑सारिणी का पालन करने का आग्रह किया गया है ताकि आगे की वित्तीय समस्याओं से बचा जा सके।
निगरानी रिपोर्टों के अनुसार ULCCS को दिए गए आधे कार्य अभी भी अधूरे हैं, कई साइटों पर निर्माण रुक गया है और समय‑सीमा में देरी दर्ज की गई है। कारणों में फंडिंग में कमी, खरीद प्रक्रिया में अड़चन और ज़मीनी अधिग्रहण की कठिनाइयाँ शामिल हैं।
राज्य के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अधूरे प्रोजेक्ट्स के कारण केरल की वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा, जबकि राज्य पहले से ही बढ़ते ऋण बोझ से जूझ रहा है। इस देरी से वह राजस्व भी प्रभावित हो सकता है, जो KIIFB के उधार लागत को संतुलित करने की उम्मीद थी।
सरकार वर्तमान में अनुबंध शर्तों की पुनः समीक्षा कर रही है और ठहराव को दूर करने के लिये अतिरिक्त वित्तीय विकल्पों की तलाश कर रही है, साथ ही ULCCS को संशोधित समय‑सारिणी का पालन करने का आग्रह किया गया है ताकि आगे की वित्तीय समस्याओं से बचा जा सके।