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27 अग. 2026
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केरल की 200 साल पुरानी पुलिकाली नृत्य ने ऑनाम को बनाया यादगार
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Nanobiotechresearcher
धर्म

केरल की 200 साल पुरानी पुलिकाली नृत्य ने ऑनाम को बनाया यादगार

✍️ Business Today 🗓 27 अग. 2026, 06:17 AM 👁 4
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पुलिकाली, दो शताब्दी से चल रहा बाघ‑रंग का लोक नृत्य, केरल के ऑनाम उत्सव का मुख्य आकर्षण बना हुआ है, जहाँ रंग‑बिरंगी पोशाकें और तालबद्ध कदम दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते हैं।

केरल के ऑनाम उत्सव में इस साल दो शताब्दी पुरानी पुलिकाली का मंचन हुआ, जहाँ कलाकार बाघ की धारियों वाले रंगों से खुद को रंगते हैं और पारम्परिक ढोल की थाप पर नाचते हैं। यह प्रथा लगभग 200 साल पहले शुरू हुई, जब यह फसल के समय और राजा महाबली की वापसी को याद करने वाले कृषि अनुष्ठानों से जुड़ी थी।

पुलिकाली कलाकार, जिन्हें स्थानीय भाषा में "पुलिकाली कलाकार" कहा जाता है, चमकीले नारंगी, काली और सफ़ेद रंगों से शरीर को रंगने में कई घंटे बिताते हैं, फिर समूह में सड़कों पर नाचते हैं। चेंडा और मड्डलम की ताल पर उनकी ऊर्जा से भरपूर हरकतें दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं, जिससे स्थानीय लोग और पर्यटक दोनों आकर्षित होते हैं।

संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह परम्परा केरल की कलात्मक विरासत को संरक्षित रखने के साथ‑साथ समुदायिक संबंधों को भी मजबूत करती है, क्योंकि गाँवों में ऑनाम से पहले कई हफ्तों तक रिहर्सल और प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती हैं। आधुनिक मनोरंजन के बावजूद, पुलिकाली आज भी बड़ी भीड़ को आकर्षित करती है, जो राज्य के सांस्कृतिक कैलेंडर में इसकी स्थायी महत्ता को दर्शाती है।
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