📷 चित्र स्रोत: Indian Express (via NewsData)
राजनीति
केरल में केंद्र के हिंदी थोपने पर विरोध, एनसीडब्ल्यू सम्मेलन के बाद
✍️ Indian Express
🗓 11 सित. 2026, 09:49 AM
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दिल्ली में एनसीडब्ल्यू सम्मेलन के बाद केरल में राजनीतिक नेताओं और नागरिक समाज ने केंद्र के हिंदी थोपने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किए।
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने इस सप्ताह दिल्ली में एक प्रमुख सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें केंद्र सरकार ने कुछ प्रशासनिक संचार में हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में उपयोग करने पर ज़ोर दिया। इस बयान पर केरल में तुरंत प्रतिक्रिया आई, जहाँ राज्य के राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसे मलयालम की प्रमुखता को कमजोर करने का प्रयास माना।
केरल की विपक्षी पार्टियों ने प्रमुख शहरों में रैलियां आयोजित कीं, केंद्र से संविधान द्वारा सुनिश्चित भाषाई अधिकारों का सम्मान करने की मांग की। उन्होंने गृह मंत्रालय से स्पष्टिकरण भी मांगा कि क्या कोई नई भाषा नीति राज्य प्रशासन को प्रभावित करेगी।
राज्य के मुख्य मंत्री ने कहा कि सरकार केंद्र के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी भाषा नीति केरल की सांस्कृतिक स्वायत्तता को नहीं छेड़े। इस बीच, एनसीडब्ल्यू ने भाषा मुद्दे पर अलग से कोई बयान नहीं दिया, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के एजेंडे पर ध्यान केंद्रित किया।
विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रीय कार्यक्रमों के दौरान भाषा राजनीति अक्सर उभरती है, और यह घटना भारत में संघवाद और क्षेत्रीय पहचान पर बहस को फिर से तेज कर सकती है।
केरल की विपक्षी पार्टियों ने प्रमुख शहरों में रैलियां आयोजित कीं, केंद्र से संविधान द्वारा सुनिश्चित भाषाई अधिकारों का सम्मान करने की मांग की। उन्होंने गृह मंत्रालय से स्पष्टिकरण भी मांगा कि क्या कोई नई भाषा नीति राज्य प्रशासन को प्रभावित करेगी।
राज्य के मुख्य मंत्री ने कहा कि सरकार केंद्र के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी भाषा नीति केरल की सांस्कृतिक स्वायत्तता को नहीं छेड़े। इस बीच, एनसीडब्ल्यू ने भाषा मुद्दे पर अलग से कोई बयान नहीं दिया, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के एजेंडे पर ध्यान केंद्रित किया।
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