📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Augustus Binu/ www.dreamsparrow.net/ facebook
अपराध
केरल हाई कोर्ट ने यौन अपराध के केस को रद्द नहीं किया, मुस्लिम शादी नहीं देती POCSO सुरक्षा
✍️ India Today
🗓 02 सित. 2026, 10:38 AM
👁 34
केरल हाई कोर्ट ने यौन अपराध के केस को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी, यह कहा कि मुस्लिम शादी POCSO अधिनियम के तहत कोई सुरक्षा नहीं देती।
केरल हाई कोर्ट ने बाल यौन शोषण से सुरक्षा के लिए बनाये गये POCSO अधिनियम के तहत दर्ज यौन अपराध के केस को रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि पीड़िता मुस्लिम व्यक्तिगत कानून के तहत विवाहित है, इसलिए मामला बंद होना चाहिए।
न्यायालय ने कहा कि POCSO अधिनियम एक विशेष कानून है जिसका उद्देश्य नाबालिगों की सुरक्षा है और इसकी प्रवर्तन में पीड़िता का धर्म या वैवाहिक स्थिति कोई मायने नहीं रखती। किसी भी व्यक्तिगत कानून के तहत हुई शादी इस कानून की कठोर प्रावधानों से बचाव नहीं कर सकती।
केस को रद्द न करने के इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि बाल यौन अपराधों को सभी समुदायों में समान रूप से सख्ती से लागू किया जाएगा, और कोई भी धार्मिक या व्यक्तिगत कानून इस सुरक्षा को कमजोर नहीं कर सकेगा।
न्यायालय ने कहा कि POCSO अधिनियम एक विशेष कानून है जिसका उद्देश्य नाबालिगों की सुरक्षा है और इसकी प्रवर्तन में पीड़िता का धर्म या वैवाहिक स्थिति कोई मायने नहीं रखती। किसी भी व्यक्तिगत कानून के तहत हुई शादी इस कानून की कठोर प्रावधानों से बचाव नहीं कर सकती।
केस को रद्द न करने के इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि बाल यौन अपराधों को सभी समुदायों में समान रूप से सख्ती से लागू किया जाएगा, और कोई भी धार्मिक या व्यक्तिगत कानून इस सुरक्षा को कमजोर नहीं कर सकेगा।