कृषि
कटनी में नीम कोटेड यूरिया की नई रैक पहुँची, 880 टन खाद किसानों को
कटनी जिले में नीम कोटेड यूरिया की एक और रैक झुकेही रैक पॉइंट पर आ गई, जिससे 880 मीट्रिक टन खाद किसानों को उपलब्ध होगी।
कटनी जिले में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप नीम कोटेड यूरिया की एक और रैक झुकेही रैक पॉइंट पर आ गई है। इस रैक से जिले को कुल 880 मीट्रिक टन यूरिया प्राप्त होगी।
जिला विपणन अधिकारी श्री आनंद नारायण पाण्डेय के अनुसार, स्लीमनाबाद, बरही और बहोरीबंद डबल लॉक केन्द्रों को 30‑30 मीट्रिक टन यूरिया तथा कटनी व मझंगवा बड़वारा डबल लॉक केंद्र को 90 मीट्रिक टन यूरिया आवंटित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक कटनी को 340 मीट्रिक टन तथा एमपी एग्रो कटनी को 60 मीट्रिक टन यूरिया वितरित किया जाएगा। सीएमएस कटनी, सीएमएस उमरियापान‑ढीमरखेड़ा, सीएमएस रीठी, सीएमएस बड़वारा, सीएमएस बाकल, सीएमएस स्लीमनाबाद और सीएमएस ढीमरखेड़ा को भी 30‑30 मीट्रिक टन यूरिया आवंटित की जाएगी।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे मिट्टी के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए संतुलित मात्रा में ही उर्वरकों का उपयोग करें। आवश्यकता से अधिक खाद के प्रयोग से कृषि लागत बढ़ने के साथ-साथ भूमि की उर्वरक क्षमता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
ई‑विकास 2.0 के तहत किसानों की सुविधा के लिए मोबाइल पर वाट्सएप बॉट के माध्यम से टोकन जनरेट करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। किसान “हेल्प” या “मदद” लिखकर टोकन, रिटेलर, उर्वरक, उठाव की तिथि और टोकन की वैधता सहित आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, जिससे वे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उर्वरक का क्रय कर सकें।
जिला विपणन अधिकारी श्री आनंद नारायण पाण्डेय के अनुसार, स्लीमनाबाद, बरही और बहोरीबंद डबल लॉक केन्द्रों को 30‑30 मीट्रिक टन यूरिया तथा कटनी व मझंगवा बड़वारा डबल लॉक केंद्र को 90 मीट्रिक टन यूरिया आवंटित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक कटनी को 340 मीट्रिक टन तथा एमपी एग्रो कटनी को 60 मीट्रिक टन यूरिया वितरित किया जाएगा। सीएमएस कटनी, सीएमएस उमरियापान‑ढीमरखेड़ा, सीएमएस रीठी, सीएमएस बड़वारा, सीएमएस बाकल, सीएमएस स्लीमनाबाद और सीएमएस ढीमरखेड़ा को भी 30‑30 मीट्रिक टन यूरिया आवंटित की जाएगी।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे मिट्टी के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए संतुलित मात्रा में ही उर्वरकों का उपयोग करें। आवश्यकता से अधिक खाद के प्रयोग से कृषि लागत बढ़ने के साथ-साथ भूमि की उर्वरक क्षमता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
ई‑विकास 2.0 के तहत किसानों की सुविधा के लिए मोबाइल पर वाट्सएप बॉट के माध्यम से टोकन जनरेट करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। किसान “हेल्प” या “मदद” लिखकर टोकन, रिटेलर, उर्वरक, उठाव की तिथि और टोकन की वैधता सहित आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, जिससे वे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उर्वरक का क्रय कर सकें।