📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Suma
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कर्नाटक की रानी चेनम्मा ने लाक्श्मीबाई से तीन दशकों पहले ब्रिटिश को हराया, फिर खो गई राजधनी
✍️ India Today
🗓 23 अक्टू. 2026, 07:01 AM
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कर्नाटक की किट्टूर की रानी चेनम्मा ने लगभग तीस साल पहले ब्रिटिश के खिलाफ सफल संघर्ष किया, पर बाद में हार कर अपना राज्य खो दिया।
कर्नाटक की 19वीं सदी की रानी, किट्टूर के राज्य की रानी चेनम्मा ने लगभग 1820 के आसपास ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को चुनौती दी, जो लाक्श्मीबाई के 1857 के विद्रोह से लगभग तीन दशकों पहले का मामला है।
उनकी सेना ने शुरुआती ब्रिटिश आक्रमण को पीछे धकेल दिया, जिससे उपनिवेशी सैनिकों को पीछे हटना पड़ा और यह दक्षिण भारत में एक स्वदेशी शासक द्वारा मिली दुर्लभ जीत थी।
परंतु ब्रिटिशों ने बड़ी सेनाओं के साथ पुनः आक्रमण किया, किट्टूर को कब्जा कर लिया और रानी को कैद कर लिया। उनके किले का नुकसान और राज्य का अधिग्रहण उनके संक्षिप्त स्वायत्तता का अंत था।
रानी चेनम्मा का प्रतिरोध अब भारतीय उपनिवेश विरोध की शुरुआती घटनाओं में से एक माना जाता है, जो 1857 के बड़े विद्रोह से पहले विभिन्न क्षेत्रीय उठापटक को उजागर करता है।
उनकी सेना ने शुरुआती ब्रिटिश आक्रमण को पीछे धकेल दिया, जिससे उपनिवेशी सैनिकों को पीछे हटना पड़ा और यह दक्षिण भारत में एक स्वदेशी शासक द्वारा मिली दुर्लभ जीत थी।
परंतु ब्रिटिशों ने बड़ी सेनाओं के साथ पुनः आक्रमण किया, किट्टूर को कब्जा कर लिया और रानी को कैद कर लिया। उनके किले का नुकसान और राज्य का अधिग्रहण उनके संक्षिप्त स्वायत्तता का अंत था।
रानी चेनम्मा का प्रतिरोध अब भारतीय उपनिवेश विरोध की शुरुआती घटनाओं में से एक माना जाता है, जो 1857 के बड़े विद्रोह से पहले विभिन्न क्षेत्रीय उठापटक को उजागर करता है।