📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
राजनीति
कर्नाटक मंत्री ने कहा, के.एच.डी. कुमारस्वामी ने सिद्धारामैया पर स्टिंग ऑपरेशन किया
✍️ India Today
🗓 03 नव. 2026, 05:02 AM
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कर्नाटक के एक मंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने वर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारामैया को निशाना बनाते हुए स्टिंग ऑपरेशन किया, जिससे राजनीतिक तनाव बढ़ा।
कर्नाटक के एक वरिष्ठ मंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने वर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारामैया के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन की योजना बनाई, यह आरोप इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार दिया गया। इस बयान में ऑपरेशन के विवरण या समय का उल्लेख नहीं किया गया।
यह आरोप दो वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के बीच लंबे समय से चल रहे प्रतिद्वंद्विता में नई जटिलता जोड़ता है, जिन्होंने पिछले दशक में राज्य की सत्ता बारी‑बारी से संभाली है। दोनों ने मुख्यमंत्री पद संभाला है, परन्तु उनकी राजनीतिक रणनीतियों और गठबंधनों में अक्सर अंतर रहा है, जिससे किसी भी गुप्त कार्रवाई का आरोप संवेदनशील बन जाता है।
कर्नाटक की शासक पार्टी ने अभी तक इस बयान पर प्रतिक्रिया नहीं दी है, और सिद्धारामैया के कार्यालय ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। विश्लेषकों का कहना है कि यह आरोप आगामी चुनावी लड़ाइयों से पहले पार्टी के भीतर तनाव को बढ़ा सकता है, परन्तु अभी तक इस स्टिंग के कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आए हैं।
इस मुद्दे को विधायी मंच पर उठाने की संभावना है, जहाँ विपक्षी सदस्य औपचारिक जांच की माँग कर सकते हैं। पुष्टि तक यह दावा एक राजनीतिक आरोप ही बना रहेगा, जो दोनों नेताओं की सार्वजनिक छवि को प्रभावित कर सकता है।
यह आरोप दो वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के बीच लंबे समय से चल रहे प्रतिद्वंद्विता में नई जटिलता जोड़ता है, जिन्होंने पिछले दशक में राज्य की सत्ता बारी‑बारी से संभाली है। दोनों ने मुख्यमंत्री पद संभाला है, परन्तु उनकी राजनीतिक रणनीतियों और गठबंधनों में अक्सर अंतर रहा है, जिससे किसी भी गुप्त कार्रवाई का आरोप संवेदनशील बन जाता है।
कर्नाटक की शासक पार्टी ने अभी तक इस बयान पर प्रतिक्रिया नहीं दी है, और सिद्धारामैया के कार्यालय ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। विश्लेषकों का कहना है कि यह आरोप आगामी चुनावी लड़ाइयों से पहले पार्टी के भीतर तनाव को बढ़ा सकता है, परन्तु अभी तक इस स्टिंग के कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आए हैं।
इस मुद्दे को विधायी मंच पर उठाने की संभावना है, जहाँ विपक्षी सदस्य औपचारिक जांच की माँग कर सकते हैं। पुष्टि तक यह दावा एक राजनीतिक आरोप ही बना रहेगा, जो दोनों नेताओं की सार्वजनिक छवि को प्रभावित कर सकता है।