📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Muhammad Mahdi Karim/ Augustus Binu
देश
कर्नाटक हाई कोर्ट ने हाथियों के विस्थापन वाले भूमि अधिग्रहण को रोक दिया
✍️ The Indian Express
🗓 01 सित. 2026, 09:38 PM
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कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा कि हाथियों को जबरन विस्थापित करने वाले भूमि अधिग्रहण को मंजूरी नहीं दी जा सकती, एक याचिका को खारिज कर दिया गया।
बेंगलुरु, 1 सितंबर (द इंडियन एक्सप्रेस) – कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें विकास के लिये भूमि अधिग्रहण की मांग की गई थी, और कहा कि हाथियों को जबरन विस्थापित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि संरक्षित वन्यजीवों के आवास को बाधित करने वाले किसी भी प्रोजेक्ट को वन संरक्षण अधिनियम और संबंधित नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि सार्वजनिक हित के लिये भूमि अधिग्रहण आवश्यक है, पर कोर्ट ने यह तर्क खारिज कर दिया कि हाथियों के झुंड को स्थानांतरित करने का पर्यावरणीय नुकसान संभावित लाभों से अधिक है। उन्होंने अधिकारियों को वैकल्पिक मार्ग खोजने का निर्देश दिया, जिससे जानवरों की प्रवास मार्ग बाधित न हों।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत की वन्यजीव संरक्षण प्रतिबद्धता को मजबूत करता है और भविष्य में वन क्षेत्रों में भूमि‑उपयोग विवादों के लिये मिसाल स्थापित कर सकता है। यह निर्णय कर्नाटक में चल रहे कई बुनियादी ढांचा प्रस्तावों को प्रभावित कर सकता है, जो हाथी आवास के साथ टकराते हैं।
अदालत ने आगे कहा कि संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्रों में किसी भी आगे के भूमि अधिग्रहण से पहले विस्तृत पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन अनिवार्य है, जिससे जैव विविधता की रक्षा में न्यायपालिका की भूमिका स्पष्ट हो।
राज्य सरकार को अब इस आदेश की समीक्षा करनी होगी और विकास योजनाओं को राज्य के प्रतिष्ठित हाथी जनसंख्या के संरक्षण के अनुरूप बनाना होगा।
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि सार्वजनिक हित के लिये भूमि अधिग्रहण आवश्यक है, पर कोर्ट ने यह तर्क खारिज कर दिया कि हाथियों के झुंड को स्थानांतरित करने का पर्यावरणीय नुकसान संभावित लाभों से अधिक है। उन्होंने अधिकारियों को वैकल्पिक मार्ग खोजने का निर्देश दिया, जिससे जानवरों की प्रवास मार्ग बाधित न हों।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत की वन्यजीव संरक्षण प्रतिबद्धता को मजबूत करता है और भविष्य में वन क्षेत्रों में भूमि‑उपयोग विवादों के लिये मिसाल स्थापित कर सकता है। यह निर्णय कर्नाटक में चल रहे कई बुनियादी ढांचा प्रस्तावों को प्रभावित कर सकता है, जो हाथी आवास के साथ टकराते हैं।
अदालत ने आगे कहा कि संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्रों में किसी भी आगे के भूमि अधिग्रहण से पहले विस्तृत पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन अनिवार्य है, जिससे जैव विविधता की रक्षा में न्यायपालिका की भूमिका स्पष्ट हो।
राज्य सरकार को अब इस आदेश की समीक्षा करनी होगी और विकास योजनाओं को राज्य के प्रतिष्ठित हाथी जनसंख्या के संरक्षण के अनुरूप बनाना होगा।