📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Muhammad Mahdi Karim/ Augustus Binu
अपराध
कर्नाटक हाई कोर्ट ने शराबी ड्राइवरों के दुर्घटना मुआवजे में 30% कटौती की
✍️ The Indian Express
🗓 15 सित. 2026, 03:36 AM
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कर्नाटक हाई कोर्ट ने शराबी ड्राइवरों के कारण हुए सड़क दुर्घटनाओं में मुआवजे को 30% घटा दिया, यह कहा कि नशे में गाड़ी चलाना समाज के लिए खतरा है।
बेंगलुरु: कर्नाटक हाई कोर्ट ने सोमवार को शराबी ड्राइवरों के कारण हुए सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ितों को मिलने वाले मुआवजे में 30% की कटौती का आदेश दिया। न्यायालय ने कहा कि नशे में गाड़ी चलाना न केवल ट्रैफ़िक नियमों का उल्लंघन है बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा भी है, इसलिए आर्थिक दंड सख़्त होना चाहिए।
यह फैसला पहले के उन मुआवजा दिशानिर्देशों को बदलता है, जिनमें शराबी ड्राइवरों के मामलों में अधिक भुगतान किया जाता था। मुआवजे को घटाकर न्यायालय का उद्देश्य लापरवाह व्यवहार को रोकना और यह संदेश देना है कि समाज को रोकथाम योग्य चोटों का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश राज्य में शराब‑संबंधी दुर्घटनाओं से उत्पन्न सभी मौजूदा और भविष्य के दावों पर लागू होगा, और अदालतें चोट की गंभीरता और आजीविका के नुकसान के आधार पर राशि में आगे समायोजन कर सकती हैं।
यह निर्णय कर्नाटक में हाल ही में हुए कई हाई‑प्रोफ़ाइल दुर्घटनाओं के बाद आया, जिनसे शराब पीकर गाड़ी चलाने के कड़े प्रवर्तन की मांग बढ़ी थी। अधिकारियों ने चेकपॉइंट पर जांच को कड़ा करने का वादा किया है, जबकि न्यायपालिका की यह पहल निवारक रणनीति में आर्थिक पहलू जोड़ती है।
यह फैसला पहले के उन मुआवजा दिशानिर्देशों को बदलता है, जिनमें शराबी ड्राइवरों के मामलों में अधिक भुगतान किया जाता था। मुआवजे को घटाकर न्यायालय का उद्देश्य लापरवाह व्यवहार को रोकना और यह संदेश देना है कि समाज को रोकथाम योग्य चोटों का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश राज्य में शराब‑संबंधी दुर्घटनाओं से उत्पन्न सभी मौजूदा और भविष्य के दावों पर लागू होगा, और अदालतें चोट की गंभीरता और आजीविका के नुकसान के आधार पर राशि में आगे समायोजन कर सकती हैं।
यह निर्णय कर्नाटक में हाल ही में हुए कई हाई‑प्रोफ़ाइल दुर्घटनाओं के बाद आया, जिनसे शराब पीकर गाड़ी चलाने के कड़े प्रवर्तन की मांग बढ़ी थी। अधिकारियों ने चेकपॉइंट पर जांच को कड़ा करने का वादा किया है, जबकि न्यायपालिका की यह पहल निवारक रणनीति में आर्थिक पहलू जोड़ती है।