📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Information and Broadcasting
राजनीति
कर्नाटक के सीएम डीके शिवाकुमार ने 543 लोकसभा सीटों और मौजूदा कोटा में महिलाओं की आरक्षण का समर्थन किया
✍️ The Economic Times
🗓 21 अग. 2026, 01:18 AM
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मुख्यमंत्री डीके शिवाकुमार ने कहा कि कर्नाटक 543 लोकसभा सीटों को बरकरार रखेगा और महिलाओं की आरक्षण को मौजूदा कुल कोटा में ही रखेगा।
बेंगलुरु, 20 अगस्त — कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवाकुमार ने लोकसभा को वर्तमान 543 सीटों पर बनाए रखने की अपनी दृढ़ता दोहराई, सीटों की संख्या बढ़ाने के किसी भी प्रस्ताव को खारिज कर दिया। मीडिया को दी गई टिप्पणी में उन्होंने कहा कि मौजूदा संसद संरचना संविधानिक संतुलन को दर्शाती है और इसे बदलना उचित नहीं है।
मुख्यमंत्री ने महिलाओं के आरक्षण के संबंध में भी स्पष्ट किया कि महिलाओं के उम्मीदवारों के लिए कोटा बढ़ाने पर विचार किया जाए तो वह मौजूदा कुल कोटा के भीतर ही रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि कोटा को मौजूदा सीमा से बाहर बढ़ाने से संसद में राज्यों के प्रतिनिधित्व में असंतुलन पैदा हो सकता है।
शिवाकुमार के बयानों के पीछे राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव सुधारों पर चल रही बहस है, जहाँ कुछ दल लोकसभा के आकार को बढ़ाने और महिलाओं के लिए अधिक सीटें तय करने की मांग कर रहे हैं। कर्नाटक के इस रुख से यह स्पष्ट होता है कि राज्य अभी के लिए मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखने की दिशा में है, विशेषकर आगामी आम चुनाव के संदर्भ में।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री की यह बात राज्य के सांसद उम्मीदवारों को प्रभावित कर सकती है और 2029 के आम चुनावों में सीट आवंटन और लिंग प्रतिनिधित्व की रणनीतियों को आकार दे सकती है।
मुख्यमंत्री ने महिलाओं के आरक्षण के संबंध में भी स्पष्ट किया कि महिलाओं के उम्मीदवारों के लिए कोटा बढ़ाने पर विचार किया जाए तो वह मौजूदा कुल कोटा के भीतर ही रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि कोटा को मौजूदा सीमा से बाहर बढ़ाने से संसद में राज्यों के प्रतिनिधित्व में असंतुलन पैदा हो सकता है।
शिवाकुमार के बयानों के पीछे राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव सुधारों पर चल रही बहस है, जहाँ कुछ दल लोकसभा के आकार को बढ़ाने और महिलाओं के लिए अधिक सीटें तय करने की मांग कर रहे हैं। कर्नाटक के इस रुख से यह स्पष्ट होता है कि राज्य अभी के लिए मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखने की दिशा में है, विशेषकर आगामी आम चुनाव के संदर्भ में।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री की यह बात राज्य के सांसद उम्मीदवारों को प्रभावित कर सकती है और 2029 के आम चुनावों में सीट आवंटन और लिंग प्रतिनिधित्व की रणनीतियों को आकार दे सकती है।