📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Vyacheslav Argenberg
विदेश
कर्नाटक और बुल्गारिया ने बायो‑ऊर्जा व हरित प्रौद्योगिकी में रणनीतिक सहयोग की खोज
✍️ The Tribune
🗓 27 अक्टू. 2026, 12:32 PM
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कर्नाटक राज्य और बुल्गारिया ने बायो‑ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा और हरित प्रौद्योगिकियों में सहयोग के लिए चर्चा शुरू की है, जैसा कि द ट्रिब्यून ने बताया।
कर्नाटक सरकार और बुल्गारिया गणराज्य के प्रतिनिधियों ने बायो‑ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा और हरित प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी स्थापित करने के लिए चर्चा शुरू की है, जैसा कि द ट्रिब्यून ने बताया। दोनों पक्ष संयुक्त शोध परियोजनाओं, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और निवेश के अवसरों की खोज करना चाहते हैं, जिससे साफ़ ऊर्जा का विकास तेज़ हो सके।
मुख्य फोकस क्षेत्रों में बायोमास‑आधारित विद्युत उत्पादन, सौर और पवन ऊर्जा का एकीकरण, तथा कम‑कार्बन औद्योगिक प्रक्रियाओं का विकास शामिल है। कर्नाटक के बढ़ते नवीकरणीय‑ऊर्जा बाजार और बुल्गारिया की यूरोपीय हरित‑तकनीक विशेषज्ञता को मिलाकर दोनों सरकारें सहयोग को लाभदायक मान रही हैं।
यह सहयोग कर्नाटक के नवीकरणीय‑ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और भारत के जलवायु लक्ष्य पूरे करने की आकांक्षा के साथ मेल खाता है, जबकि बुल्गारिया यूरोपीय संघ की बाहरी हरित एजेंडा के तहत भारतीय राज्यों के साथ संबंध मजबूत करना चाहता है। दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के बीच आगामी हफ्तों में एक ढांचा तय करने के लिए बैठकें होने की संभावना है।
यदि यह साझेदारी औपचारिक रूप लेती है, तो निजी क्षेत्र की भागीदारी, कुशल रोजगार सृजन और दोनों क्षेत्रों में सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है।
मुख्य फोकस क्षेत्रों में बायोमास‑आधारित विद्युत उत्पादन, सौर और पवन ऊर्जा का एकीकरण, तथा कम‑कार्बन औद्योगिक प्रक्रियाओं का विकास शामिल है। कर्नाटक के बढ़ते नवीकरणीय‑ऊर्जा बाजार और बुल्गारिया की यूरोपीय हरित‑तकनीक विशेषज्ञता को मिलाकर दोनों सरकारें सहयोग को लाभदायक मान रही हैं।
यह सहयोग कर्नाटक के नवीकरणीय‑ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और भारत के जलवायु लक्ष्य पूरे करने की आकांक्षा के साथ मेल खाता है, जबकि बुल्गारिया यूरोपीय संघ की बाहरी हरित एजेंडा के तहत भारतीय राज्यों के साथ संबंध मजबूत करना चाहता है। दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के बीच आगामी हफ्तों में एक ढांचा तय करने के लिए बैठकें होने की संभावना है।
यदि यह साझेदारी औपचारिक रूप लेती है, तो निजी क्षेत्र की भागीदारी, कुशल रोजगार सृजन और दोनों क्षेत्रों में सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है।