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करौली में बाल विवाह व साइबर सुरक्षा जागरूकता शिविर का आयोजन
करौली के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, लखनीपुर, चमरोला में जिला प्रशासन और एक्शनएड एसोसिएशन–डीएमजी के संयुक्त प्रयास से बाल विवाह और साइबर अपराधों के प्रति छात्रों में जागरूकता बढ़ाने हेतु शिविर आयोजित किया गया।
करौली के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, लखनीपुर, चमरोला में जिला प्रशासन और एक्शनएड एसोसिएशन–डीएमजी के संयुक्त तत्वावधान में बाल विवाह रोकथाम व साइबर सुरक्षा जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
इस शिविर में एक्शनएड एसोसिएशन के टीम लीडर विजेंद्र बैरवा ने उपस्थित छात्रों को बाल विवाह के दुष्परिणामों, कानूनी प्रावधानों तथा रोकथाम में बच्चों, अभिभावकों और समाज की भूमिका के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाल विवाह शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यक्तित्व विकास और उज्ज्वल भविष्य में बाधा उत्पन्न करता है और बालिकाओं की शिक्षा को निरंतर जारी रखने, बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा समय रहते संबंधित अधिकारियों को सूचना देने की आवश्यकता पर बल दिया।
शिविर के दौरान साइबर सुरक्षा विषय पर भी छात्रों को जागरूक किया गया। उन्हें सोशल मीडिया का सुरक्षित उपयोग, अनजान लिंक पर क्लिक न करने, व्यक्तिगत जानकारी एवं ओटीपी किसी के साथ साझा न करने तथा ऑनलाइन धोखाधड़ी से सतर्क रहने के निर्देश दिए गए। साथ ही किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी या ऑनलाइन उत्पीड़न की स्थिति में तुरंत शिकायत करने और जिम्मेदार अधिकारियों की सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।
इस प्रकार के कार्यक्रम से छात्रों में सामाजिक कुरीति तथा डिजिटल जोखिमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया, जिससे भविष्य में बाल विवाह व साइबर अपराधों के मामलों में कमी की उम्मीद की जा रही है।
इस शिविर में एक्शनएड एसोसिएशन के टीम लीडर विजेंद्र बैरवा ने उपस्थित छात्रों को बाल विवाह के दुष्परिणामों, कानूनी प्रावधानों तथा रोकथाम में बच्चों, अभिभावकों और समाज की भूमिका के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाल विवाह शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यक्तित्व विकास और उज्ज्वल भविष्य में बाधा उत्पन्न करता है और बालिकाओं की शिक्षा को निरंतर जारी रखने, बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा समय रहते संबंधित अधिकारियों को सूचना देने की आवश्यकता पर बल दिया।
शिविर के दौरान साइबर सुरक्षा विषय पर भी छात्रों को जागरूक किया गया। उन्हें सोशल मीडिया का सुरक्षित उपयोग, अनजान लिंक पर क्लिक न करने, व्यक्तिगत जानकारी एवं ओटीपी किसी के साथ साझा न करने तथा ऑनलाइन धोखाधड़ी से सतर्क रहने के निर्देश दिए गए। साथ ही किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी या ऑनलाइन उत्पीड़न की स्थिति में तुरंत शिकायत करने और जिम्मेदार अधिकारियों की सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।
इस प्रकार के कार्यक्रम से छात्रों में सामाजिक कुरीति तथा डिजिटल जोखिमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया, जिससे भविष्य में बाल विवाह व साइबर अपराधों के मामलों में कमी की उम्मीद की जा रही है।