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11 Oct 2026•
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कर्ज वसूली के उत्पीड़न के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के रुख को रेखांकित करता 'कर्ज़ मुक्ति भारत'

✍️ Reporter: Kanhaiya Kumar Jha 🗓 11 Oct 2026, 10:39 PM 👁 5
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कर्ज़ मुक्ति भारत अभियान ने लोगों को कर्ज वसूली के दौरान बैंकों, रिकवरी एजेंटों या सूदखोरों द्वारा उत्पीड़न या धमकी दिए जाने पर डरने के बजाय शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित किया है। अभियान ने सुप्रीम कोर्ट के रुख को भी उजागर किया है कि परिवार का भरण-पोषण कर्ज चुकाने से अधिक महत्वपूर्ण है।

कर्ज मुक्ति भारत अभियान ने एक महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है, जिसमें लोगों से आग्रह किया गया है कि यदि कोई बैंक, रिकवरी एजेंट या सूदखोर कर्ज वसूली के नाम पर जबरदस्ती परेशान करे, प्रताड़ित करे या धमकी दे, तो डरें नहीं। अभियान ने सलाह दी है कि ऐसी स्थिति में पीड़ित को डरने के बजाय उस उत्पीड़न की रिकॉर्डिंग या वीडियो रिकॉर्डिंग करनी चाहिए और बाकायदा शिकायत दर्ज करानी चाहिए। यह स्पष्ट किया गया है कि कर्ज लेना कोई अपराध नहीं है, और आर्थिक तंगी के कारण ईएमआई या लोन न चुका पाना भी अपराध की श्रेणी में नहीं आता।

अभियान ने सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले का हवाला देते हुए कहा है कि परिवार का भरण-पोषण करना, कर्ज चुकाने से कहीं अधिक जरूरी है। लोगों से आग्रह किया गया है कि वे खुद को अपराधी या दोषी न मानें। असली अपराधी वे लोग हैं जो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हैं। विशेष रूप से, 13% सालाना दर से अधिक ब्याज दर पर अवैध तरीके से जबरन वसूली करना एक जुर्म और अपराध है।

कर्ज मुक्ति भारत अभियान ने लोगों को संगठित होकर अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने का आह्वान किया है। यह अभियान लोगों को कर्ज के बोझ से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है और सभी नागरिकों को इसका हिस्सा बनने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। अभियान की वेबसाइट www.karzmuktbharat.co.in पर अधिक जानकारी उपलब्ध है।
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