कुनी पंचायत में नाली निर्माण के नाम पर 3 लाख रुपये का भुगतान! सड़क किनारे बनी छोटी दीवार, निर्माण कार्य पर उठे सवाल
कुनी पंचायत में नाली निर्माण के नाम पर 3 लाख रुपये का भुगतान! सड़क किनारे बनी छोटी दीवार, निर्माण कार्य पर उठे सवाल
सरगुजा जिले के लखनपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत कुनी में 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए गए नाली निर्माण कार्य को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामला नाली निर्माण के नाम पर जारी 2 लाख 25 हजार 80 रुपये के भुगतान से जुड़ा है। सरकारी भुगतान रिकॉर्ड में कार्य का विवरण नाली निर्माण सामग्री के भुगतान से संबंधित दिखाई दे रहा है, जबकि मौके पर सामने आई तस्वीर में सड़क किनारे एक छोटी सी दीवारनुमा संरचना दिखाई दे रही है।
ऐसे में सवाल उठता है कि जिस कार्य के लिए नाली निर्माण के नाम पर राशि स्वीकृत और भुगतान की प्रक्रिया पूरी की गई, क्या मौके पर उसी के अनुरूप निर्माण कराया गया है?
वीओ-1: मामला क्या है?
प्राप्त भुगतान रिकॉर्ड के अनुसार ग्राम पंचायत कुनी, एलजीडी कोड 130761 में ग्रे वाटर प्रबंधन के लिए ड्रेनेज चैनल निर्माण कार्य दर्ज है।
रिकॉर्ड में कोसम घर से संदीप के खेत तक नाली निर्माण सामग्री के भुगतान का उल्लेख है। इसके लिए 2 लाख 25 हजार 80 रुपये की राशि दर्ज है।
भुगतान रिकॉर्ड में वाउचर क्रमांक XVFC/2026-27/P/7 और दिनांक 01 अक्टूबर 2026 अंकित है। भुगतान प्राप्तकर्ता के रूप में संजय कुमार साहू का नाम दर्ज दिखाई दे रहा है।
वहीं सचिव चंद्रिका प्रसाद रायवाड़े और सरपंच तारावती ओइके के हस्ताक्षर संबंधी विवरण भी भुगतान रिकॉर्ड में दर्ज हैं।
वीओ-2: निर्माण स्थल की तस्वीर ने उठाए सवाल
अब सवाल निर्माण की वास्तविक स्थिति को लेकर है।
मौके से सामने आई तस्वीर में सड़क के किनारे एक छोटी दीवारनुमा संरचना दिखाई दे रही है। स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह निर्माण स्वीकृत नाली निर्माण कार्य के निर्धारित मापदंड, लंबाई, चौड़ाई और तकनीकी प्राक्कलन के अनुरूप है?
यदि नाली निर्माण के लिए लगभग तीन लाख रुपये का प्रावधान था, तो मौके पर हुए वास्तविक निर्माण की लागत और गुणवत्ता का मूल्यांकन कौन करेगा?
क्या इंजीनियर, तकनीकी सहायक और संबंधित अधिकारियों ने निर्माण कार्य का सही निरीक्षण किया था? क्या माप पुस्तिका (एमबी), मूल्यांकन और भुगतान से पहले भौतिक सत्यापन किया गया?
वीओ-3: सरपंच ने फोन पर क्या बताया?
इस मामले में सरपंच तारावती ओइके के पति से फोन पर जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि वहां सीसी रोड बनाया जा रहा था और सड़क पर ढलान होने के कारण यह निर्माण कराया गया है।
लेकिन अब सवाल यह है कि यदि निर्माण का उद्देश्य सीसी रोड के ढलान को नियंत्रित करना था, तो सरकारी रिकॉर्ड में इसे ग्रे वाटर प्रबंधन एवं नाली निर्माण कार्य के रूप में क्यों दर्ज किया गया?
क्या स्वीकृत कार्य और मौके पर कराए गए निर्माण में अंतर है? इसका जवाब संबंधित तकनीकी अधिकारियों और पंचायत प्रशासन को देना होगा।
एंकर क्लोजिंग:
फिलहाल ग्राम पंचायत कुनी का यह मामला जांच का विषय है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या निर्माण कार्य स्वीकृत तकनीकी प्राक्कलन के अनुसार हुआ है? क्या भुगतान से पहले इंजीनियर और तकनीकी सहायक ने मौके का निरीक्षण किया था? और क्या सरकारी राशि के उपयोग का भौतिक सत्यापन किया जाएगा?
खबर प्रकाशित होने के बाद अब निगाहें सरगुजा कलेक्टर और जिला पंचायत प्रशासन पर रहेंगी।
ग्रामीण विकास के लिए मिलने वाली सरकारी राशि का उपयोग निर्धारित कार्यों में पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
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प्रशासन से प्रमुख सवाल
1. नाली निर्माण के नाम पर 2,25,080 रुपये का भुगतान किस आधार पर किया गया?
2. स्वीकृत नाली निर्माण का वास्तविक कार्यस्थल पर कितना निर्माण हुआ?
3. इंजीनियर और तकनीकी सहायक ने निर्माण का भौतिक सत्यापन किया था या नहीं?
4. एमबी (मेजरमेंट बुक) में कितनी लंबाई और कितनी लागत दर्ज है?
5. क्या सरगुजा कलेक्टर इस मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराएंगे?
सरगुजा जिले के लखनपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत कुनी में 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए गए नाली निर्माण कार्य को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामला नाली निर्माण के नाम पर जारी 2 लाख 25 हजार 80 रुपये के भुगतान से जुड़ा है। सरकारी भुगतान रिकॉर्ड में कार्य का विवरण नाली निर्माण सामग्री के भुगतान से संबंधित दिखाई दे रहा है, जबकि मौके पर सामने आई तस्वीर में सड़क किनारे एक छोटी सी दीवारनुमा संरचना दिखाई दे रही है।
ऐसे में सवाल उठता है कि जिस कार्य के लिए नाली निर्माण के नाम पर राशि स्वीकृत और भुगतान की प्रक्रिया पूरी की गई, क्या मौके पर उसी के अनुरूप निर्माण कराया गया है?
वीओ-1: मामला क्या है?
प्राप्त भुगतान रिकॉर्ड के अनुसार ग्राम पंचायत कुनी, एलजीडी कोड 130761 में ग्रे वाटर प्रबंधन के लिए ड्रेनेज चैनल निर्माण कार्य दर्ज है।
रिकॉर्ड में कोसम घर से संदीप के खेत तक नाली निर्माण सामग्री के भुगतान का उल्लेख है। इसके लिए 2 लाख 25 हजार 80 रुपये की राशि दर्ज है।
भुगतान रिकॉर्ड में वाउचर क्रमांक XVFC/2026-27/P/7 और दिनांक 01 अक्टूबर 2026 अंकित है। भुगतान प्राप्तकर्ता के रूप में संजय कुमार साहू का नाम दर्ज दिखाई दे रहा है।
वहीं सचिव चंद्रिका प्रसाद रायवाड़े और सरपंच तारावती ओइके के हस्ताक्षर संबंधी विवरण भी भुगतान रिकॉर्ड में दर्ज हैं।
वीओ-2: निर्माण स्थल की तस्वीर ने उठाए सवाल
अब सवाल निर्माण की वास्तविक स्थिति को लेकर है।
मौके से सामने आई तस्वीर में सड़क के किनारे एक छोटी दीवारनुमा संरचना दिखाई दे रही है। स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह निर्माण स्वीकृत नाली निर्माण कार्य के निर्धारित मापदंड, लंबाई, चौड़ाई और तकनीकी प्राक्कलन के अनुरूप है?
यदि नाली निर्माण के लिए लगभग तीन लाख रुपये का प्रावधान था, तो मौके पर हुए वास्तविक निर्माण की लागत और गुणवत्ता का मूल्यांकन कौन करेगा?
क्या इंजीनियर, तकनीकी सहायक और संबंधित अधिकारियों ने निर्माण कार्य का सही निरीक्षण किया था? क्या माप पुस्तिका (एमबी), मूल्यांकन और भुगतान से पहले भौतिक सत्यापन किया गया?
वीओ-3: सरपंच ने फोन पर क्या बताया?
इस मामले में सरपंच तारावती ओइके के पति से फोन पर जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि वहां सीसी रोड बनाया जा रहा था और सड़क पर ढलान होने के कारण यह निर्माण कराया गया है।
लेकिन अब सवाल यह है कि यदि निर्माण का उद्देश्य सीसी रोड के ढलान को नियंत्रित करना था, तो सरकारी रिकॉर्ड में इसे ग्रे वाटर प्रबंधन एवं नाली निर्माण कार्य के रूप में क्यों दर्ज किया गया?
क्या स्वीकृत कार्य और मौके पर कराए गए निर्माण में अंतर है? इसका जवाब संबंधित तकनीकी अधिकारियों और पंचायत प्रशासन को देना होगा।
एंकर क्लोजिंग:
फिलहाल ग्राम पंचायत कुनी का यह मामला जांच का विषय है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या निर्माण कार्य स्वीकृत तकनीकी प्राक्कलन के अनुसार हुआ है? क्या भुगतान से पहले इंजीनियर और तकनीकी सहायक ने मौके का निरीक्षण किया था? और क्या सरकारी राशि के उपयोग का भौतिक सत्यापन किया जाएगा?
खबर प्रकाशित होने के बाद अब निगाहें सरगुजा कलेक्टर और जिला पंचायत प्रशासन पर रहेंगी।
ग्रामीण विकास के लिए मिलने वाली सरकारी राशि का उपयोग निर्धारित कार्यों में पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
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प्रशासन से प्रमुख सवाल
1. नाली निर्माण के नाम पर 2,25,080 रुपये का भुगतान किस आधार पर किया गया?
2. स्वीकृत नाली निर्माण का वास्तविक कार्यस्थल पर कितना निर्माण हुआ?
3. इंजीनियर और तकनीकी सहायक ने निर्माण का भौतिक सत्यापन किया था या नहीं?
4. एमबी (मेजरमेंट बुक) में कितनी लंबाई और कितनी लागत दर्ज है?
5. क्या सरगुजा कलेक्टर इस मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराएंगे?