• ! • 🛑 कल्याणपुरा का सच: सालों से ठप है विकास, जर्जर धर्मशाला और कीचड़ भरे रास्तों पर जनता का फूटा गुस्सा!
• ! • 🛑 कल्याणपुरा का सच: सालों से ठप है विकास, जर्जर धर्मशाला और कीचड़ भरे रास्तों पर जनता का फूटा गुस्सा!
नमस्कार, आप देख रहे हैं । चुनाव आते ही नेताओं के वादों की बरसात तो शुरू हो जाती है, लेकिन धरातल पर हकीकत क्या है, आज हम आपको दिखाने जा रहे हैं।
यह ग्राउंड रिपोर्ट है कल्याणपुरा गांव की, जहाँ इन दिनों सरपंच चुनाव को लेकर सियासी पारा चरम पर है। चुनावी मैदान में एक के बाद एक कई उम्मीदवार ताल ठोक रहे हैं, लेकिन गांव की इस बदहाली को देखकर जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है।"
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले कई कार्यकालों से इस गांव में विकास के नाम पर कोई ठोस काम नहीं हुआ। जरा इन तस्वीरों को गौर से देखिए। हल्की सी बारिश होते ही कल्याणपुरा के मुख्य रास्ते तालाब में तब्दील हो जाते हैं। सड़कों पर घुटनों तक गंदा पानी और कीचड़ जमा है, जिससे न सिर्फ पैदल चलना बल्कि दोपहिया वाहनों का निकलना भी दूभर हो चुका है।"
इतना ही नहीं, गांव की सार्वजनिक धर्मशाला की स्थिति भी बेहद बदतर हो चुकी है। गांव के सामाजिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए बनी यह धर्मशाला आज रखरखाव के अभाव में खंडहर जैसी नजर आ रही है। पिछले कई सालों से जनप्रतिनिधियों ने सिर्फ आश्वासन दिए, लेकिन गांव की इस मुख्य धरोहर को सुधारने के लिए धरातल पर काम सिवाय शून्य के कुछ नहीं रहा।"
अब जब सरपंच चुनाव का बिगुल बज चुका है, तो वोट बटोरने के लिए दर्जनों उम्मीदवार गांव की गलियों में हाथ जोड़े घूम रहे हैं। लेकिन कल्याणपुरा की जनता इस बार आर-पार के मूड में है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जो नेता पिछले पांच सालों तक गायब रहे, वे अब चुनाव आते ही हमदर्द बनने का ढोंग कर रहे हैं। इस बार कल्याणपुरा के मतदाता किसी झूठे वादे के झांसे में नहीं आएंगे, बल्कि विकास के नाम पर चोट करेंगे।"
अब देखना यह होगा कि इस बार कल्याणपुरा की कमान किसके हाथ आती है और क्या गांव को इस बदहाली से मुक्ति मिलेगी?
यह ग्राउंड रिपोर्ट है कल्याणपुरा गांव की, जहाँ इन दिनों सरपंच चुनाव को लेकर सियासी पारा चरम पर है। चुनावी मैदान में एक के बाद एक कई उम्मीदवार ताल ठोक रहे हैं, लेकिन गांव की इस बदहाली को देखकर जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है।"
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले कई कार्यकालों से इस गांव में विकास के नाम पर कोई ठोस काम नहीं हुआ। जरा इन तस्वीरों को गौर से देखिए। हल्की सी बारिश होते ही कल्याणपुरा के मुख्य रास्ते तालाब में तब्दील हो जाते हैं। सड़कों पर घुटनों तक गंदा पानी और कीचड़ जमा है, जिससे न सिर्फ पैदल चलना बल्कि दोपहिया वाहनों का निकलना भी दूभर हो चुका है।"
इतना ही नहीं, गांव की सार्वजनिक धर्मशाला की स्थिति भी बेहद बदतर हो चुकी है। गांव के सामाजिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए बनी यह धर्मशाला आज रखरखाव के अभाव में खंडहर जैसी नजर आ रही है। पिछले कई सालों से जनप्रतिनिधियों ने सिर्फ आश्वासन दिए, लेकिन गांव की इस मुख्य धरोहर को सुधारने के लिए धरातल पर काम सिवाय शून्य के कुछ नहीं रहा।"
अब जब सरपंच चुनाव का बिगुल बज चुका है, तो वोट बटोरने के लिए दर्जनों उम्मीदवार गांव की गलियों में हाथ जोड़े घूम रहे हैं। लेकिन कल्याणपुरा की जनता इस बार आर-पार के मूड में है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जो नेता पिछले पांच सालों तक गायब रहे, वे अब चुनाव आते ही हमदर्द बनने का ढोंग कर रहे हैं। इस बार कल्याणपुरा के मतदाता किसी झूठे वादे के झांसे में नहीं आएंगे, बल्कि विकास के नाम पर चोट करेंगे।"
अब देखना यह होगा कि इस बार कल्याणपुरा की कमान किसके हाथ आती है और क्या गांव को इस बदहाली से मुक्ति मिलेगी?