स्थानीय
कलेक्टर विश्वकर्मा ने धान उपार्जन में पारदर्शिता हेतु फील्ड निरीक्षण अनिवार्य किया
जालपुर के कलेक्टर ने धान उपार्जन में अनियमितताओं को रोकने के लिए प्रतिदिन फील्ड विजिट और शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन का आदेश दिया।
कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा की अध्यक्षता में उपार्जन समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें पिछले वर्ष धान उपार्जन के दौरान सामने आई अनियमितताओं, उपज की कमी, संदिग्ध ऑनलाइन प्रविष्टियों और लंबित भुगतान की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में कलेक्टर ने निर्देश दिया कि उपार्जन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी किसानों के पंजीयन एवं खरीदी केंद्रों का शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन किया जाए। केवल कागजी समीक्षा के बजाय अधिकारी नियमित रूप से फील्ड में जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करें, ताकि खरीदी केंद्रों के चयन में पिछले रिकॉर्ड और कार्यप्रणाली का परीक्षण हो सके।
पिछले वर्ष की धान खरीदी में शॉर्टफॉल प्रकरण की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने अधिकारियों को विस्तृत जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए। संदिग्ध ऑनलाइन प्रविष्टियों, वास्तविक खरीदी, किसानों के भुगतान और उपलब्ध अनाज के रिकॉर्ड का मिलान कर जिम्मेदारी निर्धारित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कलेक्टर ने किसानों के लंबित भुगतान तथा गोदामों में रखे अनाज से संबंधित मामलों की भी समीक्षा की और कहा कि उपार्जन में किसी संस्था या संगठन की गड़बड़ी का खामियाजा वास्तविक किसानों को नहीं भुगतना चाहिए। पात्र किसानों के भुगतान में अनावश्यक देरी न हो और लंबित मामलों का नियमानुसार निराकरण किया जाए।
बैठक में कलेक्टर ने निर्देश दिया कि उपार्जन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी किसानों के पंजीयन एवं खरीदी केंद्रों का शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन किया जाए। केवल कागजी समीक्षा के बजाय अधिकारी नियमित रूप से फील्ड में जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करें, ताकि खरीदी केंद्रों के चयन में पिछले रिकॉर्ड और कार्यप्रणाली का परीक्षण हो सके।
पिछले वर्ष की धान खरीदी में शॉर्टफॉल प्रकरण की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने अधिकारियों को विस्तृत जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए। संदिग्ध ऑनलाइन प्रविष्टियों, वास्तविक खरीदी, किसानों के भुगतान और उपलब्ध अनाज के रिकॉर्ड का मिलान कर जिम्मेदारी निर्धारित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कलेक्टर ने किसानों के लंबित भुगतान तथा गोदामों में रखे अनाज से संबंधित मामलों की भी समीक्षा की और कहा कि उपार्जन में किसी संस्था या संगठन की गड़बड़ी का खामियाजा वास्तविक किसानों को नहीं भुगतना चाहिए। पात्र किसानों के भुगतान में अनावश्यक देरी न हो और लंबित मामलों का नियमानुसार निराकरण किया जाए।