📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bollywood Hungama
राजनीति
पत्रकार रिचा पाराशर ने लोकसभा में राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की
✍️ Amar Ujala · Delhi
🗓 17 अक्टू. 2026, 11:16 PM
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रिपोर्टर रिचा पाराशर ने लोकसभा में राहुल गांधी और अन्य सदस्यों द्वारा धक्का देने का आरोप लगाते हुए आपराधिक शिकायत दर्ज की है।
दिल्ली, १७ अक्टूबर — पत्रकार रिचा पाराशर ने लोकसभा के भीतर राहुल गांधी और कई अन्य सांसदों द्वारा उन्हें धक्का देने का आरोप लगाते हुए आपराधिक शिकायत दर्ज की है। सोमवार को दायर शिकायत में बताया गया है कि पाराशर को संसद के सत्र के दौरान जाँच के दौरान धक्का लगा, जिससे उन्हें असुविधा और डर महसूस हुआ।
शिकायत में कहा गया है कि यह घटना बहस के तीव्र मोड़ पर हुई और उपयोग किए गए बल से पाराशर को शारीरिक चोट का खतरा महसूस हुआ। उन्होंने लोकसभा के स्पीकर से इस मामले की जांच शुरू करने और संसद के शिष्टाचार के उल्लंघन पर त्वरित कार्रवाई करने की मांग की है।
अब यह मामला लोकसभा के नैतिकता समिति के समक्ष जाएगा, जो यह तय करेगी कि शिकायत को आगे जांच या आरोपी सांसदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की आवश्यकता है या नहीं। राहुल गांधी या अन्य आरोपित सांसदों से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
यह शिकायत संसद में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं को उजागर करती है, जिसे देश भर में प्रेस स्वतंत्रता समर्थकों ने भी नोट किया है। यदि यह मामला आगे बढ़ता है, तो यह भारत के सर्वोच्च विधायी निकाय में शारीरिक टकराव के निपटारे के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
शिकायत में कहा गया है कि यह घटना बहस के तीव्र मोड़ पर हुई और उपयोग किए गए बल से पाराशर को शारीरिक चोट का खतरा महसूस हुआ। उन्होंने लोकसभा के स्पीकर से इस मामले की जांच शुरू करने और संसद के शिष्टाचार के उल्लंघन पर त्वरित कार्रवाई करने की मांग की है।
अब यह मामला लोकसभा के नैतिकता समिति के समक्ष जाएगा, जो यह तय करेगी कि शिकायत को आगे जांच या आरोपी सांसदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की आवश्यकता है या नहीं। राहुल गांधी या अन्य आरोपित सांसदों से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
यह शिकायत संसद में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं को उजागर करती है, जिसे देश भर में प्रेस स्वतंत्रता समर्थकों ने भी नोट किया है। यदि यह मामला आगे बढ़ता है, तो यह भारत के सर्वोच्च विधायी निकाय में शारीरिक टकराव के निपटारे के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।