📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / unknown
देश
जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने जल कर को हाइड्रोपावर परियोजनाओं पर रद्द किया
✍️ The Times of India
🗓 30 अक्टू. 2026, 02:17 AM
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जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने हाइड्रोपावर परियोजनाओं पर लगे जल कर को रद्द कर दिया, कानूनी और आर्थिक कारणों का हवाला देते हुए।
जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने हाल ही में राज्य में हाइड्रोपावर परियोजनाओं पर लगे जल कर को रद्द कर दिया। यह कर, जो जल उपयोग से राजस्व उत्पन्न करने के लिए लगाया गया था, राज्य के कानूनी ढांचे और जल संसाधनों पर संवैधानिक प्रावधानों के साथ असंगत पाया गया।
न्यायालय के निर्णय में यह बताया गया कि इस कर ने डेवलपर्स पर अनावश्यक वित्तीय बोझ डाला है, जिससे नई हाइड्रोपावर सुविधाओं के विकास में देरी हो सकती है और राज्य के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों पर असर पड़ सकता है। निर्णय ने यह भी इंगित किया कि यह कर राज्य के जल संसाधन अधिनियम के साथ टकराता है, जो हाइड्रोपावर परियोजनाओं पर ऐसी कर लगाने की अनुमति नहीं देता।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह फैसला अन्य जल संसाधन पर निर्भर क्षेत्रों में समान करों की समीक्षा के लिए मिसाल कायम कर सकता है। न्यायालय ने सार्वजनिक हित की रक्षा करते हुए निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया।
उद्योग हितधारकों ने इस निर्णय का स्वागत किया, यह कहते हुए कि इससे परिचालन लागत कम होगी और जम्मू-कश्मीर के बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अधिक निवेश आकर्षित होगा। सरकार से उम्मीद है कि यह निर्णय राज्य की राजस्व रणनीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करेगा।
न्यायालय के निर्णय में यह बताया गया कि इस कर ने डेवलपर्स पर अनावश्यक वित्तीय बोझ डाला है, जिससे नई हाइड्रोपावर सुविधाओं के विकास में देरी हो सकती है और राज्य के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों पर असर पड़ सकता है। निर्णय ने यह भी इंगित किया कि यह कर राज्य के जल संसाधन अधिनियम के साथ टकराता है, जो हाइड्रोपावर परियोजनाओं पर ऐसी कर लगाने की अनुमति नहीं देता।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह फैसला अन्य जल संसाधन पर निर्भर क्षेत्रों में समान करों की समीक्षा के लिए मिसाल कायम कर सकता है। न्यायालय ने सार्वजनिक हित की रक्षा करते हुए निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया।
उद्योग हितधारकों ने इस निर्णय का स्वागत किया, यह कहते हुए कि इससे परिचालन लागत कम होगी और जम्मू-कश्मीर के बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अधिक निवेश आकर्षित होगा। सरकार से उम्मीद है कि यह निर्णय राज्य की राजस्व रणनीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करेगा।