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04 सित. 2026
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जितेंद्र चौधरी ने बताया, रेत अनुमति बदलने से त्रिपुरा की नदियों को होगा नुकसान
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bdm166
राजनीति

जितेंद्र चौधरी ने बताया, रेत अनुमति बदलने से त्रिपुरा की नदियों को होगा नुकसान

✍️ Northeast Today 🗓 04 सित. 2026, 07:09 AM 👁 6
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त्रिपुरा के विधायक जितेंद्र चौधरी ने रेत अनुमति को उद्योग विभाग में स्थानांतरित करने के फैसले की निंदा की, जिससे राज्य की नदियों को खतरा है।

त्रिपुरा के विधायी सभा सदस्य जितेंद्र चौधरी ने राज्य सरकार के हालिया आदेश की कड़ी निंदा की, जिसमें रेत खनन के परमिट को जल संसाधन विभाग से उद्योग विभाग में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है। मीडिया को दी गई अपनी टिप्पणी में चौधरी ने कहा कि यह कदम नदी के किनारों के क्षरण को तेज कर सकता है, जल की गुणवत्ता को बिगाड़ सकता है और अंततः राज्य की नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट कर सकता है।

विधायिका ने तर्क दिया कि रेत निकासी सीधे नदी स्वास्थ्य से जुड़ी है और पर्यावरणीय निगरानी में ढीलापन अनियंत्रित खनन को बढ़ावा देगा। उन्होंने इस निर्णय की पुनः समीक्षा की मांग की और सरकार से जल विभाग में पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों को बरकरार रखने का आग्रह किया।

सरकार ने अभी तक इस प्रशासनिक बदलाव के पीछे का विस्तृत कारण नहीं बताया, जबकि अधिकारी कहते हैं कि यह परिवर्तन औद्योगिक विकास को तेज करने के लिए है। हालांकि, चौधरी का मानना है कि आर्थिक लाभ त्रिपुरा की प्राकृतिक नदियों के नुकसान के बदले नहीं होना चाहिए, जो कृषि, मत्स्य पालन और स्थानीय आजीविका का आधार हैं।

यह विवाद उत्तरपूर्व में रेत खनन के प्रभाव को लेकर बढ़ती चिंताओं में जोड़ता है। पर्यावरण संगठनों ने पड़ोसी राज्यों में समान समस्याओं को उजागर किया है और कड़ी नियमन तथा समुदाय की भागीदारी की मांग की है।

राज्य प्रशासन ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है, जबकि सार्वजनिक बहस जारी है।
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