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01 अक्टू. 2026•
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झारखंड के मंडर ड्रम ने पाई अंतरराष्ट्रीय पहचान
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Rameshng
मनोरंजन

झारखंड के मंडर ड्रम ने पाई अंतरराष्ट्रीय पहचान

✍️ jharkhandstatenews.com 🗓 01 अक्टू. 2026, 03:17 PM 👁 14
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झारखंड का पारंपरिक मंडर ड्रम हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है, इसके ताल को वैश्विक सांस्कृतिक महोत्सव में प्रदर्शित किया गया।

मंडर ड्रम, झारखंड का पारंपरिक तालवाद्य, पिछले महीने बर्लिन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव में प्रदर्शित होकर भारत की सीमाओं से परे दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। यह ड्रम अपनी गहरी ध्वनि और जटिल ताल के लिए जाना जाता है और झारखंड के संगीतकारों के एक समूह द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिन्होंने इस वाद्य के अनूठे निर्माण और सांस्कृतिक विरासत को उजागर किया।
यह प्रस्तुति "विश्व संगीत और नृत्य" खंड का हिस्सा थी, जहाँ 30 से अधिक देशों के कलाकार अपने-अपने मूल कला रूपों का प्रदर्शन कर रहे थे। मंडर ड्रम को इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल करना झारखंड के किसी भी लोक वाद्य के लिए पहली बार हुआ।
सांस्कृतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रदर्शन से झारखंड में पर्यटन बढ़ेगा और युवा पीढ़ी को इस शिल्प को संरक्षित करने के लिए प्रेरणा मिलेगी। ड्रम बनाने वाले, जो स्थानीय लकड़ी और पशु चमड़े का उपयोग करते हैं, आशा व्यक्त करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय मान्यता से राज्य के कारीगरों को अधिक समर्थन मिलेगा।
झारखंड के संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने देशभर में कार्यशालाओं और प्रदर्शनों की एक श्रृंखला आयोजित करने की योजना की घोषणा की है, ताकि मंडर ड्रम और अन्य स्वदेशी कला रूपों को और बढ़ावा दिया जा सके।
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