📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sandeep pranavam
राजनीति
झारखंड के प्रदर्शनकारियों ने हाई कोर्ट के फैसले पर सीएम और राहुल गांधी पर विश्वासघात का आरोप
✍️ India Today
🗓 22 अग. 2026, 11:37 PM
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झारखंड में प्रदर्शनकारियों ने हाई कोर्ट के आदेश के बाद राज्य के सीएम और राहुल गांधी पर जनता के प्रति विश्वासघात का आरोप लगाया।
इस सप्ताह की शुरुआत में झारखंड में एक बड़ी भीड़ ने हालिया हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, जिसे उन्होंने राज्य के हितों के विरुद्ध बताया। प्रदर्शनकारियों ने राज्य के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी पर जनता के प्रति विश्वासघात का आरोप लगाया।
रैली में कई नारे लगाए गए, जिसमें यह कहा गया कि कोर्ट का आदेश उन वादों के विपरीत है जो नेताओं ने पिछले चुनावों में किए थे। आयोजनकर्ता इस फैसले को राज्य के लोगों की आकांक्षाओं के खिलाफ एक धोखा मानते हैं।
मुख्य मंत्री के कार्यालय ने अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है, जबकि राहुल गांधी के प्रवक्ता ने इस समय आरोपों का जवाब देने से इनकार कर दिया। हाई कोर्ट के आदेश का संबंध एक लंबित कानूनी मुद्दे से है जो राज्य को प्रभावित करता है, परंतु सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी सीमित है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना आगामी चुनावी माहौल में तनाव बढ़ा सकती है, क्योंकि क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दोनों नेता जनता की भावना को समझने की कोशिश कर रहे हैं।
यह विरोध प्रदर्शन इस बात को उजागर करता है कि कुछ वर्गों में न्यायिक हस्तक्षेप को बिना पर्याप्त स्थानीय परामर्श के लागू किया जाने पर निराशा बढ़ रही है।
रैली में कई नारे लगाए गए, जिसमें यह कहा गया कि कोर्ट का आदेश उन वादों के विपरीत है जो नेताओं ने पिछले चुनावों में किए थे। आयोजनकर्ता इस फैसले को राज्य के लोगों की आकांक्षाओं के खिलाफ एक धोखा मानते हैं।
मुख्य मंत्री के कार्यालय ने अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है, जबकि राहुल गांधी के प्रवक्ता ने इस समय आरोपों का जवाब देने से इनकार कर दिया। हाई कोर्ट के आदेश का संबंध एक लंबित कानूनी मुद्दे से है जो राज्य को प्रभावित करता है, परंतु सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी सीमित है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना आगामी चुनावी माहौल में तनाव बढ़ा सकती है, क्योंकि क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दोनों नेता जनता की भावना को समझने की कोशिश कर रहे हैं।
यह विरोध प्रदर्शन इस बात को उजागर करता है कि कुछ वर्गों में न्यायिक हस्तक्षेप को बिना पर्याप्त स्थानीय परामर्श के लागू किया जाने पर निराशा बढ़ रही है।