📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Flashthomsom
अपराध
झारखंड हाई कोर्ट ने कहा, दहेज मृत्यु में पत्नी की भागीदारी तलाक का कारण नहीं
✍️ The Indian Express
🗓 03 सित. 2026, 06:34 AM
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झारखंड हाई कोर्ट ने कहा कि दहेज मृत्यु में पत्नी की कथित भागीदारी तलाक का वैध कारण नहीं है।
झारखंड हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया कि दहेज मृत्यु के मामले में पत्नी की भागीदारी को अकेले तलाक का आधार नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने वैवाहिक विवादों के लिये निर्धारित कानूनी मानदंडों की समीक्षा की और कहा कि आपराधिक आरोप केवल वैवाहिक असहमति का प्रमाण नहीं बनते।
कोर्ट ने कहा कि तलाक के लिये क्रूरता, परित्याग या व्यभिचार जैसे स्पष्ट कारणों की आवश्यकता होती है, जिनके लिये ठोस सबूत चाहिए। दहेज मृत्यु एक गंभीर अपराध है, परन्तु यह स्वतः वैवाहिक असंगति नहीं दर्शाता।
कानूनी विश्लेषकों ने बताया कि यह निर्णय यह सिद्धांत मजबूत करता है कि पारिवारिक मामलों को आपराधिक मामलों से अलग करके देखना चाहिए और तलाक के लिये साक्ष्य की कड़ी मानक लागू करनी चाहिए।
यह आदेश उन भविष्य के याचिकाओं पर असर डाल सकता है जहाँ पति‑पत्नी आपराधिक आरोपों के आधार पर तलाक चाहते हैं, और यह स्पष्ट करता है कि दहेज उत्पीड़न के आरोप को आपराधिक प्रक्रिया में ही निपटाया जाना चाहिए, जबकि वैवाहिक राहत अलग प्रक्रिया से दी जाएगी।
कोर्ट ने कहा कि तलाक के लिये क्रूरता, परित्याग या व्यभिचार जैसे स्पष्ट कारणों की आवश्यकता होती है, जिनके लिये ठोस सबूत चाहिए। दहेज मृत्यु एक गंभीर अपराध है, परन्तु यह स्वतः वैवाहिक असंगति नहीं दर्शाता।
कानूनी विश्लेषकों ने बताया कि यह निर्णय यह सिद्धांत मजबूत करता है कि पारिवारिक मामलों को आपराधिक मामलों से अलग करके देखना चाहिए और तलाक के लिये साक्ष्य की कड़ी मानक लागू करनी चाहिए।
यह आदेश उन भविष्य के याचिकाओं पर असर डाल सकता है जहाँ पति‑पत्नी आपराधिक आरोपों के आधार पर तलाक चाहते हैं, और यह स्पष्ट करता है कि दहेज उत्पीड़न के आरोप को आपराधिक प्रक्रिया में ही निपटाया जाना चाहिए, जबकि वैवाहिक राहत अलग प्रक्रिया से दी जाएगी।