📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Flashthomsom
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जकारखंड उच्च न्यायालय ने मानसिक बीमारी के बावजूद पति को पत्नी को रख-रखाव देने का आदेश दिया
✍️ The Indian Express
🗓 15 जुल. 2026, 12:47 PM
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जकारखंड उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि मानसिक बीमारी के बावजूद पति को अपनी पत्नी को रख-रखाव देना अनिवार्य है।
जकारखंड उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक निर्णय में कहा कि पति को अपनी पत्नी को रख-रखाव देना जारी रखना चाहिए।
पति ने यह तर्क दिया कि मानसिक बीमारी के कारण वह इस दायित्व से मुक्त है, पर न्यायालय ने इस दावे को अस्वीकार कर दिया।
न्यायालय ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति व्यक्ति की क्षमता को प्रभावित कर सकती है, पर यह वैवाहिक रख-रखाव के दायित्व को समाप्त नहीं करती।
इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि वैवाहिक वित्तीय जिम्मेदारियाँ व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद बनी रहती हैं, और पति को तुरंत भुगतान पुनः शुरू करने का निर्देश दिया गया।
पति ने यह तर्क दिया कि मानसिक बीमारी के कारण वह इस दायित्व से मुक्त है, पर न्यायालय ने इस दावे को अस्वीकार कर दिया।
न्यायालय ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति व्यक्ति की क्षमता को प्रभावित कर सकती है, पर यह वैवाहिक रख-रखाव के दायित्व को समाप्त नहीं करती।
इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि वैवाहिक वित्तीय जिम्मेदारियाँ व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद बनी रहती हैं, और पति को तुरंत भुगतान पुनः शुरू करने का निर्देश दिया गया।