📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Flashthomsom
अपराध
झारखंड हाई कोर्ट ने जमानत शर्तों को ‘एक हाथ से देना, दूसरे हाथ से लेना’ कहा
✍️ Live Law
🗓 28 अग. 2026, 02:03 AM
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झारखंड हाई कोर्ट ने हालिया जमानत मामले में लगाई गई शर्तों को अत्यधिक प्रतिबंधात्मक बताया और उन्हें ‘एक हाथ से देना, दूसरे हाथ से लेना’ कहा।
एक हालिया सुनवाई के दौरान, झारखंड हाई कोर्ट के एक पैनल ने एक आरोपी पर लगाए गए जमानत शर्तों की समीक्षा की और उन्हें अत्यधिक बोझिल पाया। न्यायाधीशों ने कहा कि ये शर्तें जमानत के मूल उद्देश्य को नष्ट कर देती हैं, इसे "एक हाथ से देना, दूसरे हाथ से लेना" के रूप में वर्णित किया।
कोर्ट ने रेखांकित किया कि जमानत को न्याय के हित और आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाना चाहिए, और अनुपातहीन प्रतिबंध इस लक्ष्य को बाधित करते हैं। जबकि पैनल ने शर्तों में विशिष्ट बदलावों का विवरण नहीं दिया, उन्होंने संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप उन्हें पुनः विचार करने की इच्छा व्यक्त की।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह टिप्पणी भविष्य में भारत के विभिन्न न्यायालयों में जमानत संबंधी न्यायशास्त्र को प्रभावित कर सकती है, जिससे प्रतिबंधात्मक शर्तों के स्वरूप पर पुनः विचार हो सकता है। हाई कोर्ट का यह रुख व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ जांच संबंधी आवश्यकताओं को संतुलित करने की व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है।
कोर्ट ने रेखांकित किया कि जमानत को न्याय के हित और आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाना चाहिए, और अनुपातहीन प्रतिबंध इस लक्ष्य को बाधित करते हैं। जबकि पैनल ने शर्तों में विशिष्ट बदलावों का विवरण नहीं दिया, उन्होंने संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप उन्हें पुनः विचार करने की इच्छा व्यक्त की।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह टिप्पणी भविष्य में भारत के विभिन्न न्यायालयों में जमानत संबंधी न्यायशास्त्र को प्रभावित कर सकती है, जिससे प्रतिबंधात्मक शर्तों के स्वरूप पर पुनः विचार हो सकता है। हाई कोर्ट का यह रुख व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ जांच संबंधी आवश्यकताओं को संतुलित करने की व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है।