📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Flashthomsom
अपराध
झारखंड हाई कोर्ट ने पुलिस स्टेशन में सीसीटीवी देर से लगने पर कंटेम्प नोटिस जारी
✍️ Live Law
🗓 13 अक्टू. 2026, 01:32 AM
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झारखंड हाई कोर्ट ने पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना में देरी के कारण अधिकारियों को कंटेम्प नोटिस जारी किया, पिछले आदेश की अनदेखी पर ध्यान दिलाते हुए।
झारखंड हाई कोर्ट ने सोमवार को राज्य पुलिस विभाग को कंटेम्प नोटिस जारी किया, क्योंकि पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरों की अनिवार्य स्थापना अभी तक पूरी नहीं हुई है। कोर्ट ने पहले सभी ज़िला स्तर के स्टेशनों में कार्यशील सीसीटीवी सिस्टम लगाने का निर्देश दिया था, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
अदालत के आदेश में कहा गया है कि इस देरी से न्यायिक प्राधिकरण की अवहेलना हुई है और यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूरा नहीं हुआ तो दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। नोटिस में विस्तृत प्रगति रिपोर्ट और शेष स्थापितियों के लिए ठोस समय‑सारणी प्रस्तुत करने को कहा गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कंटेम्प कार्यवाही दुर्लभ होती है, पर यह कानून‑प्रवर्तन बुनियादी ढाँचे के आधुनिकीकरण के प्रति न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। पुलिस विभाग को शीघ्र अनुपालन करने के लिए कहा गया है, ताकि आगे कोई दंड न लगाया जाए।
हाई कोर्ट का हस्तक्षेप पुलिस स्टेशनों में सुरक्षा संबंधी चिंताओं और वास्तविक‑समय निगरानी की आवश्यकता को उजागर करता है, जिससे दुराचार को रोका जा सके और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
अदालत इस मुद्दे की निगरानी जारी रखेगी और अगले सुनवाई में अनुपालन की समीक्षा करेगी।
अदालत के आदेश में कहा गया है कि इस देरी से न्यायिक प्राधिकरण की अवहेलना हुई है और यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूरा नहीं हुआ तो दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। नोटिस में विस्तृत प्रगति रिपोर्ट और शेष स्थापितियों के लिए ठोस समय‑सारणी प्रस्तुत करने को कहा गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कंटेम्प कार्यवाही दुर्लभ होती है, पर यह कानून‑प्रवर्तन बुनियादी ढाँचे के आधुनिकीकरण के प्रति न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। पुलिस विभाग को शीघ्र अनुपालन करने के लिए कहा गया है, ताकि आगे कोई दंड न लगाया जाए।
हाई कोर्ट का हस्तक्षेप पुलिस स्टेशनों में सुरक्षा संबंधी चिंताओं और वास्तविक‑समय निगरानी की आवश्यकता को उजागर करता है, जिससे दुराचार को रोका जा सके और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
अदालत इस मुद्दे की निगरानी जारी रखेगी और अगले सुनवाई में अनुपालन की समीक्षा करेगी।