📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Flashthomsom
नौकरी
झारखंड हाई कोर्ट ने JSSC‑CGL और CDPO परीक्षा नियुक्तियों को रद्द करने वाले आदेश पर अंतरिम रोक लगाई
✍️ News On AIR
🗓 25 अग. 2026, 11:02 AM
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झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिससे JSSC‑CGL और CDPO परीक्षाओं में चयनित उम्मीदवारों की नियुक्तियों को रद्द नहीं किया जा सकेगा।
झारखंड हाई कोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगाई है, जिसमें झारखंड उपराज्य सेवा आयोग (JSSC) के कॉम्बाइंड ग्रेजुएट लेवल (CGL) तथा सेंट्रल डिपार्टमेंटल पुलिस ऑफिसर (CDPO) परीक्षाओं में चयनित उम्मीदवारों की नियुक्तियों को रद्द करने का प्रावधान था। कोर्ट ने आगे की सुनवाई तक इस रद्दीकरण को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है।
सरकार ने पहले एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियों को वापस लेने का उल्लेख किया गया था, लेकिन सार्वजनिक रूप से कोई विशिष्ट कारण नहीं बताया गया। इस अधिसूचना को चुनौती देते हुए प्रभावित उम्मीदवारों ने याचिका दायर की, जिसके बाद हाई कोर्ट ने उनके नियुक्ति अधिकारों को संरक्षित करने के लिए हस्तक्षेप किया।
पेटिशनकर्ताओं के कानूनी प्रतिनिधियों ने इस अंतरिम रोक का स्वागत किया, यह कहा कि इससे उन सैकड़ों अभ्यर्थियों को तुरंत नौकरी से वंचित होने से बचाया जा रहा है, जिन्होंने प्रतिस्पर्धी परीक्षा पास की है। कोर्ट ने सरकार के रद्दीकरण आदेश की वैधता की पूरी जांच के लिए एक पूर्ण सुनवाई निर्धारित की है, जिससे यह तय होगा कि नियुक्तियों को बरकरार रखा जाए या रद्द किया जाए।
अंतिम निर्णय तक उम्मीदवारों को अनिश्चित स्थिति में रहना पड़ेगा, जबकि राज्य प्रशासन को आदेश दिया गया है कि वह नियुक्तियों पर कोई आगे की कार्रवाई न करे और वर्तमान स्थिति को बनाए रखे।
सरकार ने पहले एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियों को वापस लेने का उल्लेख किया गया था, लेकिन सार्वजनिक रूप से कोई विशिष्ट कारण नहीं बताया गया। इस अधिसूचना को चुनौती देते हुए प्रभावित उम्मीदवारों ने याचिका दायर की, जिसके बाद हाई कोर्ट ने उनके नियुक्ति अधिकारों को संरक्षित करने के लिए हस्तक्षेप किया।
पेटिशनकर्ताओं के कानूनी प्रतिनिधियों ने इस अंतरिम रोक का स्वागत किया, यह कहा कि इससे उन सैकड़ों अभ्यर्थियों को तुरंत नौकरी से वंचित होने से बचाया जा रहा है, जिन्होंने प्रतिस्पर्धी परीक्षा पास की है। कोर्ट ने सरकार के रद्दीकरण आदेश की वैधता की पूरी जांच के लिए एक पूर्ण सुनवाई निर्धारित की है, जिससे यह तय होगा कि नियुक्तियों को बरकरार रखा जाए या रद्द किया जाए।
अंतिम निर्णय तक उम्मीदवारों को अनिश्चित स्थिति में रहना पड़ेगा, जबकि राज्य प्रशासन को आदेश दिया गया है कि वह नियुक्तियों पर कोई आगे की कार्रवाई न करे और वर्तमान स्थिति को बनाए रखे।