📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ank Kumar
राजनीति
झारखंड में डिप्टी गवर्नर की नियुक्ति एक दिन पूर्व सेवानिवृत्ति पर सुप्रीम कोर्ट के नियमों का उल्लंघन
✍️ Live Law
🗓 08 सित. 2026, 10:49 PM
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झारखंड के डिप्टी गवर्नर की नियुक्ति सेवानिवृत्ति के एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट के नियमों का उल्लंघन करती है, एक अमीक्स क्यूरी फाइलिंग के अनुसार।
एक वरिष्ठ अधिकारी को झारखंड के डिप्टी गवर्नर (डीजीपी) के पद पर सेवानिवृत्ति के एक दिन पहले नियुक्त किया गया, जिससे सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ पुलिस नियुक्ति नियमों का उल्लंघन हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि किसी भी डिप्टी गवर्नर की नियुक्ति सेवानिवृत्ति के 30 दिनों के भीतर नहीं होनी चाहिए, ताकि सेवा की अखंडता बनी रहे।
एक अमीक्स क्यूरी ने याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया है कि यह नियुक्ति कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करती है और भविष्य की नियुक्तियों के लिए एक खतरनाक मिसाल स्थापित कर सकती है। यह याचिका तर्क देती है कि ऐसी निर्णय से मेरिट‑आधारित प्रणाली को नुकसान पहुँच सकता है और पुलिस पदानुक्रम में सार्वजनिक विश्वास घट सकता है।
झारखंड पुलिस विभाग ने अभी तक इस नियुक्ति या कानूनी चुनौती के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आने वाले हफ्तों में सुना जाएगा, जहाँ कोर्ट यह जाँच करेगा कि नियुक्ति उसके स्थापित दिशानिर्देशों के अनुरूप है या नहीं।
यदि सुप्रीम कोर्ट पाता है कि नियुक्ति अवैध है, तो वह अधिकारी को पद से हटाने या अन्य सुधारात्मक उपायों का आदेश दे सकता है। इस निर्णय से अन्य राज्यों में भी नियुक्ति प्रक्रियाओं की समीक्षा की संभावना है ताकि कोर्ट के निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
एक अमीक्स क्यूरी ने याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया है कि यह नियुक्ति कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करती है और भविष्य की नियुक्तियों के लिए एक खतरनाक मिसाल स्थापित कर सकती है। यह याचिका तर्क देती है कि ऐसी निर्णय से मेरिट‑आधारित प्रणाली को नुकसान पहुँच सकता है और पुलिस पदानुक्रम में सार्वजनिक विश्वास घट सकता है।
झारखंड पुलिस विभाग ने अभी तक इस नियुक्ति या कानूनी चुनौती के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आने वाले हफ्तों में सुना जाएगा, जहाँ कोर्ट यह जाँच करेगा कि नियुक्ति उसके स्थापित दिशानिर्देशों के अनुरूप है या नहीं।
यदि सुप्रीम कोर्ट पाता है कि नियुक्ति अवैध है, तो वह अधिकारी को पद से हटाने या अन्य सुधारात्मक उपायों का आदेश दे सकता है। इस निर्णय से अन्य राज्यों में भी नियुक्ति प्रक्रियाओं की समीक्षा की संभावना है ताकि कोर्ट के निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।