📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Flashthomsom
अपराध
झारखंड अदालत ने कहा, पुलिस अधिकारी के बयान पर रिपोर्ट प्रकाशित करने वाले पत्रकार को मानहानि के लिए उत्तरदायी नहीं
✍️ livelaw.in
🗓 10 सित. 2026, 03:03 AM
👁 36
झारखंड की अदालत ने फैसला सुनाया कि पुलिस अधिकारी के बयान को समाचार में प्रकाशित करने वाले पत्रकार को मानहानि के आरोप में दायित्व नहीं है।
झारखंड की अदालत ने पत्रकारों की मानहानि उत्तरदायित्व की सीमा को स्पष्ट करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि जब कोई पत्रकार पुलिस अधिकारी के आधिकारिक बयान को समाचार में प्रकाशित करता है, तो वह मानहानि के मुकदमे से सुरक्षित रहता है। अधिकारी के शब्दों को आधिकारिक रिकॉर्ड माना गया, इसलिए उन्हें निजी बयान की तरह नहीं माना गया।
यह निर्णय तब आया जब एक शिकायत दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि प्रकाशित रिपोर्ट ने किसी अनाम व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाया है। न्यायालय ने यह जांचा कि क्या पत्रकार ने अधिकारी के बयान को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया या केवल रिपोर्ट किया। यह निष्कर्ष निकालते हुए कि पत्रकार केवल आधिकारिक जानकारी का माध्यम बना, अदालत ने मानहानि मुकदमा खारिज कर दिया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला यह सिद्धांत मजबूत करता है कि प्रेस सार्वजनिक अधिकारियों के बयानों को बिना परिवर्तन के प्रसारित कर सकता है। यह निर्णय राज्य भर में पुलिस बयानों की मीडिया रिपोर्टिंग के लिए मार्गदर्शक बन सकता है।
यह मामला भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की रक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता के बीच संतुलन को रेखांकित करता है।
यह निर्णय तब आया जब एक शिकायत दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि प्रकाशित रिपोर्ट ने किसी अनाम व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाया है। न्यायालय ने यह जांचा कि क्या पत्रकार ने अधिकारी के बयान को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया या केवल रिपोर्ट किया। यह निष्कर्ष निकालते हुए कि पत्रकार केवल आधिकारिक जानकारी का माध्यम बना, अदालत ने मानहानि मुकदमा खारिज कर दिया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला यह सिद्धांत मजबूत करता है कि प्रेस सार्वजनिक अधिकारियों के बयानों को बिना परिवर्तन के प्रसारित कर सकता है। यह निर्णय राज्य भर में पुलिस बयानों की मीडिया रिपोर्टिंग के लिए मार्गदर्शक बन सकता है।
यह मामला भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की रक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता के बीच संतुलन को रेखांकित करता है।