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11 अक्टू. 2026•
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झारखंड कोर्ट ने कहा ‘झाड़‑फूंक’ आरोपों में इरादा न हो तो धारा 307 लागू नहीं
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Flashthomsom
अपराध

झारखंड कोर्ट ने कहा ‘झाड़‑फूंक’ आरोपों में इरादा न हो तो धारा 307 लागू नहीं

✍️ Live Law 🗓 11 अक्टू. 2026, 05:46 PM 👁 14
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झारखंड के न्यायालय ने बताया कि ‘झाड़‑फूंक’ के आरोपों में मृत्यु का इरादा सिद्ध न होने पर धारा 307 आईपीसी लागू नहीं होगी।

झारखंड उच्च न्यायालय ने हाल ही में दायर “झाड़‑फूंक” के आरोपों की सुनवाई की, जिसमें कहा गया था कि यह एक प्रकार का उत्पीड़न या डराने‑धमकाने का कार्य है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 307, जो प्रयत्निक हत्या से संबंधित है, के तहत अभियोजन के लिये मृत्यु का इरादा सिद्ध होना अनिवार्य है। इरादा न हो तो इस धारा के तहत आरोप नहीं लगाया जा सकता।

वकीलों का कहना है कि इस प्रकार के कृत्य को उत्पीड़न या हमला जैसी अन्य धारा के तहत दंडित किया जा सकता है, परन्तु प्रयत्निक हत्या के लिये साक्ष्य का मानक बहुत अधिक है। यह फैसला यह दर्शाता है कि अभियोजन को धारा 307 लागू करने से पहले स्पष्ट रूप से हत्या का इरादा सिद्ध करना आवश्यक है।

इस निर्णय से झारखंड की पुलिस को भविष्य में ऐसे मामलों की जांच में मार्गदर्शन मिलेगा, जिससे आरोपों को आईपीसी के मानदंडों के अनुसार ही दर्ज किया जाएगा।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि “झाड़‑फूंक” से संबंधित भविष्य के याचिकाओं को उपयुक्त धारा के तहत ही जांचा जाए, ताकि गंभीर दंडात्मक प्रावधानों का दुरुपयोग न हो।

यह स्पष्टीकरण पीड़ितों की सुरक्षा और न्याय प्रणाली की सटीकता दोनों को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दिया गया है।
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