शिक्षा
झारखंड के माननीय राज्यपाल ने विनोबा भावे विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में शिक्षा और सत्य के महत्व पर प्रेरणादायक संबोधन दिया
हजारीबाग में आयोजित 11वें दीक्षांत समारोह में झारखंड के राज्यपाल ने विद्यार्थियों को शिक्षा, अनुशासन और सत्य के महत्व पर संदेश दिया, विश्वविद्यालय के आदर्श वाक्य 'जीवनं सत्यशोधनम्' के साथ नई ऊर्जा और उम्मीद जगाई।
30 अक्टूबर 2026 को हजारीबाग में विनोबा भावे विश्वविद्यालय ने अपना 11वाँ दीक्षांत समारोह आयोजित किया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी स्नातक छात्र और उनके परिवार, तथा अतिथि मंडल ने भाग लिया।
समारोह में झारखंड के माननीय राज्यपाल-सह-कुलाधिपति ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थिति दर्ज कराई और विद्यार्थियों को शिक्षा, अनुशासन, नैतिकता और सत्य के महत्व पर प्रेरणादायक संबोधन दिया। उन्होंने उच्च शिक्षा को केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र के विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया।
विश्वविद्यालय का आदर्श वाक्य 'जीवनं सत्यशोधनम्' सत्य की खोज और ज्ञान की साधना का संदेश देता है, और इस संदेश के साथ ही राज्यपाल ने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग समाज एवं देश की उन्नति के लिए करने का आह्वान किया।
इस दीक्षांत समारोह ने विद्यार्थियों में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और भविष्य के प्रति नई उम्मीद जगाई, और यह उनके शैक्षणिक जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में याद रहेगी।
समारोह में झारखंड के माननीय राज्यपाल-सह-कुलाधिपति ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थिति दर्ज कराई और विद्यार्थियों को शिक्षा, अनुशासन, नैतिकता और सत्य के महत्व पर प्रेरणादायक संबोधन दिया। उन्होंने उच्च शिक्षा को केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र के विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया।
विश्वविद्यालय का आदर्श वाक्य 'जीवनं सत्यशोधनम्' सत्य की खोज और ज्ञान की साधना का संदेश देता है, और इस संदेश के साथ ही राज्यपाल ने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग समाज एवं देश की उन्नति के लिए करने का आह्वान किया।
इस दीक्षांत समारोह ने विद्यार्थियों में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और भविष्य के प्रति नई उम्मीद जगाई, और यह उनके शैक्षणिक जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में याद रहेगी।