धर्म
जवारे की घनी फसल को माना गया शुभ संकेत, नवरात्रि‑दशहरा पर दोहराई गई परम्परा
लंबे समय बाद घनी और स्वस्थ जवारे की फसल को शुभ संकेत माना गया और पूजा के बाद इसे दोनों कानों पर धारण करने की परम्परा दोहराई गई।
लंबे समय के बाद इस वर्ष ‘जवारे’ (खेत्री) की फसल अत्यधिक घनी और स्वस्थ उगी, जिसे स्थानीय लोगों ने अत्यंत शुभ संकेत के रूप में स्वीकार किया।
पूजा समाप्त होने के बाद इस फसल को मातृआशीर्वाद के प्रतीक के रूप में दोनों कानों पर धारण करने की परम्परा दोहराई गई, जो कई पीढ़ियों से चली आ रही है।
स्थानीय मान्यतानुसार, मातृकृपा से प्राप्त यह आशीर्वाद संपन्नता और शक्ति को बढ़ाता है, जो राष्ट्र और धर्म के दुश्मनों के विनाश तथा देश की रक्षा में सहायक होगा।
यह परम्परा नवरात्रि एवं दशहरा के पावन अवसरों पर विशेष रूप से मनाई जाती है।
पूजा समाप्त होने के बाद इस फसल को मातृआशीर्वाद के प्रतीक के रूप में दोनों कानों पर धारण करने की परम्परा दोहराई गई, जो कई पीढ़ियों से चली आ रही है।
स्थानीय मान्यतानुसार, मातृकृपा से प्राप्त यह आशीर्वाद संपन्नता और शक्ति को बढ़ाता है, जो राष्ट्र और धर्म के दुश्मनों के विनाश तथा देश की रक्षा में सहायक होगा।
यह परम्परा नवरात्रि एवं दशहरा के पावन अवसरों पर विशेष रूप से मनाई जाती है।