🔥 ट्रेंडिंग सिकंदरा राऊ: माता काली की झांकी ने मचा... સુરતમાં પાંડેસરા રોડ પર કચરા ગાડીએ 10થ... સમીના નાની ચંદુર ગામે નવરાત્રી મહોત્સવ... સુરતમાં દશેરા‑વિજયાદશમી માટે પોલીસ હેડ... நாமக்கல் மாவட்டத்தில் பிஜேபி மாவட்ட செ... સુરતમાં 'છોટા યોગી' સામે ગોડાદરા પોલીસ...
21 अक्टू. 2026•
ગુજરાતી मराठी ਪੰਜਾਬੀ বাংলা
धर्म

जवारे की घनी फसल को माना गया शुभ संकेत, नवरात्रि‑दशहरा पर दोहराई गई परम्परा

✍️ रिपोर्टर: Kanhaiya Kumar Jha 🗓 21 अक्टू. 2026, 08:54 AM 👁 16
शेयर करें: 💬 WhatsApp 📘 Facebook 𝕏 Post

लंबे समय बाद घनी और स्वस्थ जवारे की फसल को शुभ संकेत माना गया और पूजा के बाद इसे दोनों कानों पर धारण करने की परम्परा दोहराई गई।

लंबे समय के बाद इस वर्ष ‘जवारे’ (खेत्री) की फसल अत्यधिक घनी और स्वस्थ उगी, जिसे स्थानीय लोगों ने अत्यंत शुभ संकेत के रूप में स्वीकार किया।

पूजा समाप्त होने के बाद इस फसल को मातृआशीर्वाद के प्रतीक के रूप में दोनों कानों पर धारण करने की परम्परा दोहराई गई, जो कई पीढ़ियों से चली आ रही है।

स्थानीय मान्यतानुसार, मातृकृपा से प्राप्त यह आशीर्वाद संपन्नता और शक्ति को बढ़ाता है, जो राष्ट्र और धर्म के दुश्मनों के विनाश तथा देश की रक्षा में सहायक होगा।

यह परम्परा नवरात्रि एवं दशहरा के पावन अवसरों पर विशेष रूप से मनाई जाती है।
📲Get App