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22 Sep 2026
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जनसुराज नेत्री सह पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र कि उम्मीदवार डॉ दिव्या ज्योति ने पटना के विभिन्न विश्वविद्यालयों का किया दौरा
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जनसुराज नेत्री सह पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र कि उम्मीदवार डॉ दिव्या ज्योति ने पटना के विभिन्न विश्वविद्यालयों का किया दौरा

✍️ Reporter: Awanish Kumar 🗓 12 Sep 2026, 09:01 PM 👁 45
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जनसुराज नेत्री सह पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार डॉ दिव्या ज्योति ने कहा कि अब आवाज नहीं उठेगी व्यवस्था बदलने कि लड़ाई लड़ी जाएगी

पटना से अवनीश कुमार कि रिपोर्ट
अब सिर्फ आवाज़ नहीं उठेगी व्यवस्था बदलने की लड़ाई लड़ी जाएगी”
जन सुराज की सदस्यता लेकर डॉ. दिव्या ज्योति ने शिक्षक अधिकार, वित्त रहित शिक्षकों, अल्पसंख्यक विद्यालयों और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार का संकल्प दोहराया
पटना, 12 सितंबर 2026:
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी प्रत्याशी डॉ. दिव्या ज्योति ने आज जन सुराज की सदस्यता ग्रहण कर अपनी राजनीतिक यात्रा को एक नई दिशा देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक दल बदलने या सदस्यता लेने का सामान्य निर्णय नहीं है, बल्कि बिहार के शिक्षकों, शिक्षा व्यवस्था और शिक्षा से जुड़े लाखों परिवारों के अधिकारों एवं सम्मान की लड़ाई को राजनीतिक शक्ति देने का संकल्प है।
डॉ. दिव्या ज्योति ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में कार्य किया है और शिक्षकों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को नजदीक से समझा है। पटना, नालंदा और नवादा सहित पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के शिक्षक समाज के विश्वास और समर्थन ने उन्हें यह निर्णय लेने की प्रेरणा दी है।
उन्होंने कहा
“अब शिक्षकों की आवाज केवल ज्ञापन, धरना और आश्वासन तक सीमित नहीं रहेगी। शिक्षक की आवाज नीति और निर्णय लेने के केंद्र तक पहुंचेगी। अब सिर्फ आवाज नहीं उठेगी व्यवस्था बदलने की लड़ाई लड़ी जाएगी।”


वित्त रहित शिक्षकों के लिए अब “लॉलीपॉप नहीं, लिखित वेतनमान चाहिए”
डॉ. दिव्या ज्योति ने बिहार के वित्त रहित शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की दशकों पुरानी समस्या को अपनी प्राथमिक लड़ाई बताते हुए कहा कि वर्षों से हजारों शिक्षक आर्थिक असुरक्षा, अनिश्चित सेवा-स्थिति और सम्मानजनक जीवन के संकट से जूझ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से यदि वित्त रहित शिक्षकों के वेतनमान या नियमित भुगतान को लेकर कोई सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो उसका स्वागत किया जाएगा, लेकिन अब केवल मौखिक घोषणा पर्याप्त नहीं होगी।
“वित्त रहित शिक्षकों को लॉलीपॉप नहीं, लिखित वेतनमान चाहिए। भाषण नहीं, सरकारी आदेश चाहिए। आश्वासन नहीं, भुगतान की निश्चित तारीख चाहिए। तालियां नहीं, तनख्वाह चाहिए।”
डॉ. दिव्या ज्योति ने सरकार से मांग की कि यदि वित्त रहित शिक्षकों के लिए वेतनमान अथवा नियमित भुगतान का निर्णय हो चुका है, तो उसका स्पष्ट सरकारी आदेश/अधिसूचना, पात्रता की शर्तें, भुगतान की समय-सीमा, बकाया भुगतान, सेवा-सुरक्षा और भविष्य की पेंशन व्यवस्था सार्वजनिक की जाए।
उन्होंने कहा कि तीन-चार दशक से सेवा दे रहे शिक्षकों को हर चुनाव के समय नए आश्वासन देना समस्या का समाधान नहीं है। अब सरकार को ऐसी स्थायी एवं पारदर्शी नीति बनानी होगी, जिससे शिक्षकों को बार-बार आंदोलन और आश्वासन के बीच न रहना पड़े।

न्यायालयों के निर्णयों की भावना के अनुरूप स्पष्ट नीति की मांग
डॉ. दिव्या ज्योति ने कहा कि वित्त रहित शिक्षा व्यवस्था और संबद्ध महाविद्यालयों से जुड़े मामलों में पटना हाईकोर्ट के विभिन्न निर्णयों में राज्य की नीतियों, अनुदान, नियुक्तियों और शिक्षकों के मामलों की वैधानिक जांच पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां हुई हैं।
पटना हाईकोर्ट के हालिया निर्णयों में यह भी दर्ज है कि राज्य सरकार ने 21 नवंबर 2008 के संकल्प संख्या 1846 के माध्यम से वित्त रहित शिक्षा नीति को समाप्त कर संस्थानों, जिसमें डिग्री कॉलेज भी शामिल हैं, को अनुदान उपलब्ध कराने की नीति अपनाई थी। 2015 एवं 2017 के विधायी संशोधनों में संबद्ध डिग्री कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों के मामलों की जांच के लिए प्रावधान किए गए।
डॉ. दिव्या ज्योति ने कहा कि न्यायालयों के आदेशों और राज्य की घोषित नीतियों के बाद भी यदि शिक्षक वर्षों तक अपने वेतन, सेवा-सुरक्षा और अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहें, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता है।
उन्होंने कहा
“न्यायालय का दरवाजा शिक्षक बार-बार क्यों खटखटाए? सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए कि वैध शिक्षक को अपने अधिकार के लिए वर्षों तक मुकदमा न लड़ना पड़े।”
उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बनाम मामले में के दावे की कानूनी कसौटियों और भर्ती प्रक्रिया, योग्यता, कार्य एवं जिम्मेदारियों जैसे कारकों पर विस्तार से विचार किया था। यह निर्णय सीधे बिहार के वित्त रहित शिक्षकों को वेतनमान देने का आदेश नहीं है, इसलिए इसे गलत तरीके से प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए; लेकिन यह निर्णय शिक्षक सेवा-शर्तों और वेतन-समानता के प्रश्न पर राज्य की नीति तथा कानूनी प्रक्रिया की गंभीरता को रेखांकित करता है।
डॉ. दिव्या ज्योति ने कहा कि उनका उद्देश्य न्यायालय के आदेशों की राजनीतिक व्याख्या करना नहीं, बल्कि न्यायसंगत, स्पष्ट और लागू करने योग्य सरकारी नीति के लिए राजनीतिक दबाव बनाना है।

वर्तमान एमएलसी से सवाल: तीन दशक के बाद भी शिक्षक क्यों इंतजार कर रहे हैं?
वित्त रहित शिक्षकों के मुद्दे पर डॉ. दिव्या ज्योति ने वर्तमान एमएलसी नवल किशोर यादव की भूमिका पर भी सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि वर्षों से यदि वित्त रहित शिक्षक वेतन, सेवा-सुरक्षा और सम्मान के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो केवल घोषणाओं को उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करना पर्याप्त नहीं है।
“शिक्षकों को यह बताया जाए कि सरकारी आदेश कहां है? अधिसूचना कब जारी हुई? भुगतान की निश्चित तारीख क्या है? बकाया राशि कब मिलेगी? सेवा-सुरक्षा और पेंशन का क्या प्रावधान है? शिक्षक भाषण नहीं, दस्तावेज मांग रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि अब शिक्षक समाज को केवल राजनीतिक आश्वासनों के आधार पर निर्णय नहीं लेना चाहिए, बल्कि लिखित आदेश, समयबद्ध क्रियान्वयन और जवाबदेही को आधार बनाना चाहिए।

अल्पसंख्यक विद्यालयों की समस्याओं पर भी संघर्ष होगा
डॉ. दिव्या ज्योति ने कहा कि बिहार के अल्पसंख्यक विद्यालयों की समस्याएं भी शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इन्हें राजनीतिक प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कई अल्पसंख्यक विद्यालयों के सामने वेतन भुगतान में देरी, अनुदान, शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा, स्वीकृत पद, नियुक्ति एवं अनुमोदन, आधारभूत संरचना, प्रशासनिक प्रक्रियाओं में विलंब तथा संस्थानों के अधिकारों एवं स्वायत्तता से जुड़े प्रश्न लंबे समय से मौजूद हैं।
उन्होंने कहा
अल्पसंख्यक विद्यालयों को राजनीतिक उपेक्षा का शिकार नहीं बनाया जा सकता। इन संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षक भी शिक्षक हैं, उनके अधिकार भी शिक्षक अधिकार हैं और वहां पढ़ने वाले बच्चे भी बिहार के भविष्य हैं।
उन्होंने सरकार से मांग की कि अल्पसंख्यक विद्यालयों की समस्याओं के समाधान के लिए समयबद्ध शिकायत निवारण तंत्र, पारदर्शी अनुदान व्यवस्था, वैध शिक्षकों के वेतन भुगतान, स्वीकृत पदों पर स्पष्ट नीति और प्रशासनिक मामलों के त्वरित निपटारे की व्यवस्था की जाए।

शिक्षक केवल वोटर नहीं, नीति निर्माता बने
जन सुराज से जुड़ने के बाद अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए डॉ. दिव्या ज्योति ने कहा कि उनकी राजनीति का केंद्र शिक्षक, शिक्षा और युवा होंगे।
उन्होंने कहा
शिक्षक केवल वोट देने वाला वर्ग नहीं है। शिक्षक वह वर्ग है जो बिहार के भविष्य का निर्माण करता है। इसलिए शिक्षा नीति बनाने में शिक्षक की निर्णायक भागीदारी होनी चाहिए।”
उन्होंने शिक्षकों से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर संघर्ष जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया, जिनमें
•वित्त रहित शिक्षकों को सम्मानजनक एवं स्थायी वेतन व्यवस्था
लंबित वेतन एवं अनुदान का समयबद्ध भुगतान
सेवा-सुरक्षा और स्पष्ट सेवा नियम
पेंशन एवं सामाजिक सुरक्षा
योग्य शिक्षकों के लिए प्रोन्नति के अवसर
• समान कार्य के लिए न्यायपूर्ण वेतन व्यवस्था
•महिला शिक्षकों के लिए विशेष मातृत्व एवं स्वास्थ्य सुविधाएं
•अल्पसंख्यक विद्यालयों की समस्याओं का समाधान
विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों की अकादमिक स्वायत्तता
डिग्री कॉलेजों एवं उनके शिक्षकों से संबंधित नीतिगत समस्याओं का समाधान
•शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता
शिक्षा विभाग में जवाबदेही और समयबद्ध प्रशासन
शिक्षक सम्मान एवं शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार
शामिल हैं।

आश्वासन की राजनीति नहीं, जवाबदेही की राजनीति
डॉ. दिव्या ज्योति ने कहा कि बिहार के शिक्षक समाज को अब ऐसी राजनीति चाहिए जो चुनाव के समय दिखाई दे और चुनाव के बाद भी उनके साथ खड़ी रहे।
उन्होंने कहा
“अब राजनीति केवल सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने का माध्यम नहीं होनी चाहिए। राजनीति जनता के सवालों को सत्ता के फैसलों तक पहुंचाने का माध्यम होनी चाहिए।”
उन्होंने कहा कि शिक्षक कमजोर होगा तो बिहार की शिक्षा व्यवस्था कमजोर होगी और शिक्षा व्यवस्था कमजोर होगी तो बिहार का भविष्य कमजोर होगा।
“जब शिक्षक बिहार का भविष्य तैयार करता है, तो उसके भविष्य की चिंता कौन करेगा? मैं करूंगी और शिक्षक समाज के साथ मिलकर करूंगी।”

डॉ. दिव्या ज्योति का संकल्प
डॉ. दिव्या ज्योति ने कहा कि जन सुराज के मंच से वह शिक्षक समाज के अधिकारों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की लड़ाई को और मजबूत करेंगी।
उन्होंने कहा
अब खोखले आश्वासन नहीं।
अब केवल चुनावी वादे नहीं।
अब शिक्षकों की समस्याओं पर चुप्पी नहीं।
अब चाहिए लिखित निर्णय, समयबद्ध क्रियान्वयन और जवाबदेही
उन्होंने पटना, नालंदा और नवादा सहित पूरे पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के शिक्षकों, शिक्षक संगठनों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि शिक्षक सम्मान, शिक्षा के उत्थान और न्यायपूर्ण व्यवस्था की लड़ाई है।
शिक्षक की आवाज दबेगी नहींअब और बुलंद होगी।
शिक्षक केवल वोटर नहींनीति तय करने वाली आवाज बनेगा।
डॉ. दिव्या ज्योति
एमएलसी प्रत्याशी, पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
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