📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / UnpetitproleX
टेक्नोलॉजी
जम्मू-कश्मीर में छत पर सौर पैनल की तेज़ गति से स्थापना, पावर सचिव
✍️ Daily Excelsior
🗓 04 अक्टू. 2026, 04:02 AM
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पावर सचिव ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में छत पर सौर पैनलों की तेज़ गति से स्थापना को आगे बढ़ाया जाएगा।
न्यू दिल्ली के पावर सचिव ने बताया कि जम्मू-कश्मीर सरकार छत पर सौर परियोजनाओं की त्वरित कार्यान्वयन के लिए कदम बढ़ा रही है, जिससे राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि होगी। यह दिशा-निर्देश राष्ट्रीय स्तर पर सौर क्षमता बढ़ाने और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता घटाने के व्यापक लक्ष्य के तहत आया है। अधिकारियों का मानना है कि तेज़ गति से कार्यान्वयन घरों और व्यवसायों को छत पर सौर पैनल स्थापित करने के लिए प्रेरित करेगा। यह पहल भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा है।
पावर सचिव ने कहा कि आगामी चरण में अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल बनाना और संभावित स्थापितकर्ताओं को तकनीकी सहायता प्रदान करना प्राथमिकता होगी। जबकि विशिष्ट लक्ष्य नहीं बताए गए, तेज़ गति से अपनाने के लिए अनुकूल माहौल बनाने पर ज़ोर दिया गया है। सभी हितधारकों को नई समयसीमा के साथ तालमेल बिठाने और समय पर कार्यान्वयन सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि तेज़ कार्यान्वयन स्थानीय सौर पैनल निर्माण और स्थापना‑रखरखाव से जुड़े रोजगार सृजन को भी प्रोत्साहित करेगा। यह पहल केंद्र सरकार की विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा समाधान को बढ़ावा देने की नीति के साथ भी संगत है, विशेषकर जम्मू-कश्मीर के दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में।
पावर सचिव ने कहा कि आगामी चरण में अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल बनाना और संभावित स्थापितकर्ताओं को तकनीकी सहायता प्रदान करना प्राथमिकता होगी। जबकि विशिष्ट लक्ष्य नहीं बताए गए, तेज़ गति से अपनाने के लिए अनुकूल माहौल बनाने पर ज़ोर दिया गया है। सभी हितधारकों को नई समयसीमा के साथ तालमेल बिठाने और समय पर कार्यान्वयन सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि तेज़ कार्यान्वयन स्थानीय सौर पैनल निर्माण और स्थापना‑रखरखाव से जुड़े रोजगार सृजन को भी प्रोत्साहित करेगा। यह पहल केंद्र सरकार की विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा समाधान को बढ़ावा देने की नीति के साथ भी संगत है, विशेषकर जम्मू-कश्मीर के दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में।