📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / UnpetitproleX
शिक्षा
जम्मू-कश्मीर ने निजी विश्वविद्यालयों में 25% सीट व नौकरियों में स्थानीय उम्मीदवारों को आरक्षित किया
✍️ The Times of India
🗓 08 नव. 2026, 08:02 PM
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जम्मू-कश्मीर सरकार ने निजी विश्वविद्यालयों में स्थानीय उम्मीदवारों के लिए कम से कम 25% सीट और नौकरियों को आरक्षित करने का नियम जारी किया है।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने एक अधिसूचना जारी की है, जिसमें सभी निजी विश्वविद्यालयों को राज्य के निवासियों के लिए कम से कम 25% शैक्षणिक सीटें और नौकरी के पद आरक्षित करने का आदेश दिया गया है। यह नियम जम्मू-कश्मीर उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी किया गया है और निजी क्षेत्र में स्थानीय छात्रों और स्नातकों की भागीदारी बढ़ाने को लक्षित करता है।
नियम के अनुसार, निजी संस्थानों को प्रत्येक पाठ्यक्रम में कुल प्रवेश का एक‑चौथाई हिस्सा तथा सभी स्टाफ़ पदों का 25% स्थानीय उम्मीदवारों को देना होगा। यह आरक्षण अगले प्रवेश सत्र से लागू होगा, हालांकि अधिसूचना में सटीक कार्यान्वयन तिथि का उल्लेख नहीं है।
सरकार का कहना है कि यह कदम क्षेत्र की बेरोजगारी समस्या को कम करने और स्थानीय प्रतिभा को गुणवत्ता पूर्ण उच्च शिक्षा संस्थानों तक पहुँच प्रदान करने में सहायक होगा। कुछ शैक्षणिक संगठनों ने इसे क्षेत्रीय विकास के लिए सकारात्मक माना है, जबकि कुछ ने संस्थागत स्वायत्तता और अनुपालन संबंधी चिंताएँ व्यक्त की हैं।
अधिसूचना में गैर‑अनुपालन के लिए दंड का उल्लेख नहीं है, परन्तु यह नीति स्पष्ट रूप से निजी शिक्षा क्षेत्र में स्थानीय मानव संसाधन को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव दर्शाती है।
नियम के अनुसार, निजी संस्थानों को प्रत्येक पाठ्यक्रम में कुल प्रवेश का एक‑चौथाई हिस्सा तथा सभी स्टाफ़ पदों का 25% स्थानीय उम्मीदवारों को देना होगा। यह आरक्षण अगले प्रवेश सत्र से लागू होगा, हालांकि अधिसूचना में सटीक कार्यान्वयन तिथि का उल्लेख नहीं है।
सरकार का कहना है कि यह कदम क्षेत्र की बेरोजगारी समस्या को कम करने और स्थानीय प्रतिभा को गुणवत्ता पूर्ण उच्च शिक्षा संस्थानों तक पहुँच प्रदान करने में सहायक होगा। कुछ शैक्षणिक संगठनों ने इसे क्षेत्रीय विकास के लिए सकारात्मक माना है, जबकि कुछ ने संस्थागत स्वायत्तता और अनुपालन संबंधी चिंताएँ व्यक्त की हैं।
अधिसूचना में गैर‑अनुपालन के लिए दंड का उल्लेख नहीं है, परन्तु यह नीति स्पष्ट रूप से निजी शिक्षा क्षेत्र में स्थानीय मानव संसाधन को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव दर्शाती है।