📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ramchandra9
राजनीति
जम्मू-कश्मीर विधानसभा का छठा सत्र 21 सितंबर से, प्रावvisional कैलेंडर जारी
✍️ Daily Excelsior
🗓 09 सित. 2026, 01:36 AM
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने बताया कि उसका छठा सत्र 21 सितंबर से शुरू होगा, साथ ही सत्र के कार्यक्रम का provisional कैलेंडर जारी किया गया है।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने प्रावvisional कैलेंडर जारी कर यह बताया कि उसका छठा सत्र 21 सितंबर से शुरू होगा। यह घोषणा विधानसभा सचिवालय ने की और यह कैलेंडर सत्र की पहली बैठक का संकेत देता है।
प्रावvisional कैलेंडर में विधायी कार्यों की तिथियां, जैसे बहस, प्रश्नकाल और समिति बैठकों के दिनांक शामिल हैं, जिससे सदस्यों को आगामी हफ्तों की कार्यवाही का ढांचा मिल सके। इसमें विशेष सत्रों की संभावित तिथियां भी दर्शाई गई हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि इस सत्र की शुरुआत उस समय हो रही है जब राज्य विकास पहल और 2019 के पुनर्गठन के बाद लाई गई नीतियों की समीक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। सत्र का समय पर शुरू होना भविष्य के चुनावी चक्रों से पहले विधायी निरंतरता बनाए रखने का प्रयास माना जा रहा है।
सत्र का आयोजन सrinagar स्थित विधानसभा परिसर में होगा और मानक प्रक्रिया के अनुसार मौजूदा मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सदस्यों की बैठक होगी। इस सत्र की कार्यवाही से सरकार की आगामी प्राथमिकताओं का पता चलने की उम्मीद है।
प्रावvisional कैलेंडर का जारी होना प्रशासन की पारदर्शी और समयबद्ध विधायी प्रक्रिया को सुनिश्चित करने की इच्छा को दर्शाता है, जिससे केंद्र शासित प्रदेश में स्थिर शासकीय माहौल का संकेत मिलता है।
प्रावvisional कैलेंडर में विधायी कार्यों की तिथियां, जैसे बहस, प्रश्नकाल और समिति बैठकों के दिनांक शामिल हैं, जिससे सदस्यों को आगामी हफ्तों की कार्यवाही का ढांचा मिल सके। इसमें विशेष सत्रों की संभावित तिथियां भी दर्शाई गई हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि इस सत्र की शुरुआत उस समय हो रही है जब राज्य विकास पहल और 2019 के पुनर्गठन के बाद लाई गई नीतियों की समीक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। सत्र का समय पर शुरू होना भविष्य के चुनावी चक्रों से पहले विधायी निरंतरता बनाए रखने का प्रयास माना जा रहा है।
सत्र का आयोजन सrinagar स्थित विधानसभा परिसर में होगा और मानक प्रक्रिया के अनुसार मौजूदा मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सदस्यों की बैठक होगी। इस सत्र की कार्यवाही से सरकार की आगामी प्राथमिकताओं का पता चलने की उम्मीद है।
प्रावvisional कैलेंडर का जारी होना प्रशासन की पारदर्शी और समयबद्ध विधायी प्रक्रिया को सुनिश्चित करने की इच्छा को दर्शाता है, जिससे केंद्र शासित प्रदेश में स्थिर शासकीय माहौल का संकेत मिलता है।