Religion
जमुई के लछुआड़ में मां काली के जयकारों से गूंजा तीन दिवसीय मेला, जिलाधिकारी‑एसपी ने किया शुभारंभ
जमुई जिले के लछुआड़ में मां काली पूजा के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय मेले का भव्य शुभारंभ हुआ, जहाँ जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त रूप से फीता काटा।
लछुआड़, जमुई जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल में मां काली पूजा के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय मेले का भव्य शुभारंभ हुआ। जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त रूप से फीता काटा, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव और भक्ति का माहौल स्थापित हुआ।
उद्घाटन के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। मातृ काली के जयकारों से लछुआड़ का वातावरण भक्तिमय हो उठा, और दूर‑दराज के क्षेत्रों से आए भक्तों ने पूजा‑अर्चना तथा मन्नतें मां के दरबार में अर्पित कीं।
मेले के पहले दिन महिला, पुरुष और बच्चे सभी ने उत्साह के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लिया। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और लोक आस्था का भी प्रदर्शन हुआ।
जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष महत्व दिया, जिससे सामाजिक सौहार्द और धार्मिक आस्था का सुंदर मिश्रण देखा गया। आयोजकों का मानना है कि इस मेले में श्रद्धालुओं की संख्या अगले दिनों में भी बढ़ती रहेगी।
लछुआड़ का यह मेला न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि क्षेत्र की परम्परा, संस्कृति और लोक विश्वास का प्रतीक भी है, जहाँ मातृ काली की भक्ति और जयकारें पूरे स्थान को गूँजती रहती हैं।
उद्घाटन के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। मातृ काली के जयकारों से लछुआड़ का वातावरण भक्तिमय हो उठा, और दूर‑दराज के क्षेत्रों से आए भक्तों ने पूजा‑अर्चना तथा मन्नतें मां के दरबार में अर्पित कीं।
मेले के पहले दिन महिला, पुरुष और बच्चे सभी ने उत्साह के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लिया। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और लोक आस्था का भी प्रदर्शन हुआ।
जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष महत्व दिया, जिससे सामाजिक सौहार्द और धार्मिक आस्था का सुंदर मिश्रण देखा गया। आयोजकों का मानना है कि इस मेले में श्रद्धालुओं की संख्या अगले दिनों में भी बढ़ती रहेगी।
लछुआड़ का यह मेला न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि क्षेत्र की परम्परा, संस्कृति और लोक विश्वास का प्रतीक भी है, जहाँ मातृ काली की भक्ति और जयकारें पूरे स्थान को गूँजती रहती हैं।