📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Wikimedia Commons
राजनीति
जालौर में 32 साल बाद सभापति सीट अनारक्षित, चुनाव में सरगर्मी तेज
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 22 अग. 2026, 07:12 AM
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जालौर नगर परिषद में 32 साल बाद सभापति पद अनारक्षित हो गया, जिससे दिग्गज राजनेता चुनाव की तैयारी में जुटे हैं।
जालौर नगर परिषद ने यह घोषणा की कि सभापति पद, जो पहले आरक्षित था, अब 32 साल बाद सभी के लिए खुला है। इस बदलाव से उन अनुभवी राजनेताओं की भागीदारी बढ़ेगी, जिन्हें आरक्षण नियमों के कारण पहले पीछे रखा गया था।
भाजपा और कांग्रेस दोनों को अब वार्ड स्तर पर मजबूत उम्मीदवार पेश करने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। दोनों दलों को स्थानीय प्रभाव और पार्टी की व्यापक रणनीति को संतुलित करके मतों को जीतना होगा।
सभापति की अंतिम नियुक्ति इस बात पर निर्भर करेगी कि कौन सा दल या गठबंधन नगर परिषद में स्पष्ट बहुमत हासिल करता है। बहुमत स्थापित होने तक कुर्सी का फैसला अनिश्चित रहेगा, जिससे राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तीव्र बनी हुई है।
चुनाव अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अनारक्षित स्थिति सभी वार्डों पर लागू होगी, जिससे जालौर के स्थानीय शासन में शक्ति संतुलन बदल सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा से शहर के विकास कार्यों और नागरिक प्रशासन पर भी असर पड़ सकता है।
भाजपा और कांग्रेस दोनों को अब वार्ड स्तर पर मजबूत उम्मीदवार पेश करने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। दोनों दलों को स्थानीय प्रभाव और पार्टी की व्यापक रणनीति को संतुलित करके मतों को जीतना होगा।
सभापति की अंतिम नियुक्ति इस बात पर निर्भर करेगी कि कौन सा दल या गठबंधन नगर परिषद में स्पष्ट बहुमत हासिल करता है। बहुमत स्थापित होने तक कुर्सी का फैसला अनिश्चित रहेगा, जिससे राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तीव्र बनी हुई है।
चुनाव अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अनारक्षित स्थिति सभी वार्डों पर लागू होगी, जिससे जालौर के स्थानीय शासन में शक्ति संतुलन बदल सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा से शहर के विकास कार्यों और नागरिक प्रशासन पर भी असर पड़ सकता है।