📷 चित्र स्रोत: Indian Express (via NewsData)
विदेश
जैशंकर ने भारत‑बांग्लादेश संबंधों में साझा हितों पर बल दिया
✍️ Indian Express
🗓 23 अग. 2026, 07:40 AM
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विदेश मंत्री एस. जैशंकर ने कहा, हालिया कूटनीतिक ठंड के बावजूद भारत‑बांग्लादेश के हित एक-दूसरे से जुड़े हैं और दोनों को साझा बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए।
विदेश मंत्री एस. जैशंकर ने नई दिल्ली में एक प्रेस ब्रीफ़िंग के दौरान कहा कि भारत‑बांग्लादेश के बीच हालिया कूटनीतिक ठंड के बावजूद दोनों देशों के कई रणनीतिक और आर्थिक हित जुड़े हुए हैं। उन्होंने जल प्रबंधन, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को संबंधों की नींव बताया।
जैशंकर ने कहा कि कुछ बिंदु‑बिंदु के मतभेदों को पूरी बातचीत पर हावी नहीं होने देना चाहिए और दोनों सरकारों को तेज़ा जल बाँटने और सीमा‑पार कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर रचनात्मक संवाद जारी रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्थिर पड़ोसी दक्षिण एशिया के विकास के लिए आवश्यक है।
इन टिप्पणियों के बीच सीमा प्रबंधन और व्यापार बाधाओं को लेकर कूटनीतिक तनाव की खबरें आ रही थीं, परंतु जैशंकर ने दोनों देशों के सहयोग के इतिहास और साझे हितों पर ज़ोर दिया। उन्होंने उच्च‑स्तरीय संवाद जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि मौजूदा समझौतों को और सुदृढ़ किया जा सके।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान संबंधों की दिशा को पुनः स्थापित करने की कोशिश है, जिससे दोनों राजधानियों को साझे लाभ के साथ साझेदारी को गहरा करने की इच्छा स्पष्ट होती है। साझा बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करके दोनों देशों को रचनात्मक मार्ग पर लौटने की उम्मीद है।
अभी तक कोई नया समझौता नहीं हुआ, परंतु संवाद पर ज़ोर देना यह संकेत देता है कि भविष्य में बचे हुए मुद्दों को सुलझाने और मौजूदा सहयोग को विस्तारित करने के लिए वार्तालाप जारी रहेगा।
जैशंकर ने कहा कि कुछ बिंदु‑बिंदु के मतभेदों को पूरी बातचीत पर हावी नहीं होने देना चाहिए और दोनों सरकारों को तेज़ा जल बाँटने और सीमा‑पार कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर रचनात्मक संवाद जारी रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्थिर पड़ोसी दक्षिण एशिया के विकास के लिए आवश्यक है।
इन टिप्पणियों के बीच सीमा प्रबंधन और व्यापार बाधाओं को लेकर कूटनीतिक तनाव की खबरें आ रही थीं, परंतु जैशंकर ने दोनों देशों के सहयोग के इतिहास और साझे हितों पर ज़ोर दिया। उन्होंने उच्च‑स्तरीय संवाद जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि मौजूदा समझौतों को और सुदृढ़ किया जा सके।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान संबंधों की दिशा को पुनः स्थापित करने की कोशिश है, जिससे दोनों राजधानियों को साझे लाभ के साथ साझेदारी को गहरा करने की इच्छा स्पष्ट होती है। साझा बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करके दोनों देशों को रचनात्मक मार्ग पर लौटने की उम्मीद है।
अभी तक कोई नया समझौता नहीं हुआ, परंतु संवाद पर ज़ोर देना यह संकेत देता है कि भविष्य में बचे हुए मुद्दों को सुलझाने और मौजूदा सहयोग को विस्तारित करने के लिए वार्तालाप जारी रहेगा।