📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Jakub Hałun
अपराध
जयपुर परिवहन विभाग ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों पर सख्त कार्रवाई की
✍️ Amar Ujala · Jaipur
🗓 22 अग. 2026, 12:38 AM
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राजस्थान परिवहन विभाग ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र व यूडीआईएसई कार्ड से सरकारी लाभ लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश जारी किए और सभी रीजन से दिव्यांग कर्मचारियों का विवरण मांगा।
राजस्थान परिवहन विभाग ने यह घोषणा की है कि फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र और यूडीआईएसई कार्ड के माध्यम से सरकारी लाभ प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जयपुर मुख्यालय से जारी इस निर्देश में अधिकारियों को मौजूदा नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू करने और अनधिकृत रूप से प्राप्त लाभ रद्द करने का आदेश दिया गया है।
आदेश के अनुसार, झूठे प्रमाणपत्र का उपयोग करने वाले किसी भी व्यक्ति को राज्य के धोखाधड़ी एवं भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत दंडित किया जाएगा, तथा विभाग जांच के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय करेगा। गलत दस्तावेज़ों के आधार पर वितरित किए गए लाभों की वसूली भी की जाएगी।
साथ ही, विभाग ने सभी रीजन कार्यालयों से दिव्यांग कर्मचारियों की विस्तृत सूची प्रस्तुत करने को कहा है, ताकि प्रमाणिकता की पुष्टि की जा सके और आगे के दुरुपयोग को रोका जा सके। यह डेटा संग्रह वास्तविक लाभार्थियों को उचित समर्थन सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट रिकॉर्ड बनाने में सहायक होगा।
यह कदम राज्य के विभिन्न विभागों में कल्याण योजनाओं के दुरुपयोग को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाता है, और अधिकारियों ने कहा है कि नियमित ऑडिट और कड़ी जाँच से ऐसी प्रथा को समाप्त किया जाएगा।
आदेश के अनुसार, झूठे प्रमाणपत्र का उपयोग करने वाले किसी भी व्यक्ति को राज्य के धोखाधड़ी एवं भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत दंडित किया जाएगा, तथा विभाग जांच के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय करेगा। गलत दस्तावेज़ों के आधार पर वितरित किए गए लाभों की वसूली भी की जाएगी।
साथ ही, विभाग ने सभी रीजन कार्यालयों से दिव्यांग कर्मचारियों की विस्तृत सूची प्रस्तुत करने को कहा है, ताकि प्रमाणिकता की पुष्टि की जा सके और आगे के दुरुपयोग को रोका जा सके। यह डेटा संग्रह वास्तविक लाभार्थियों को उचित समर्थन सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट रिकॉर्ड बनाने में सहायक होगा।
यह कदम राज्य के विभिन्न विभागों में कल्याण योजनाओं के दुरुपयोग को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाता है, और अधिकारियों ने कहा है कि नियमित ऑडिट और कड़ी जाँच से ऐसी प्रथा को समाप्त किया जाएगा।